मेट्रो रेल नेटवर्क के जरिए न केवल राजधानी में जिंदगी को रफ्तार मिलेगी, बल्कि एक लाख परिवारों के लिए आशियाने का भी इंतजाम किया जाएगा।
लगभग तीन करोड़ वर्ग फीट भूमि पर मेट्रो एक विकासकर्ता के माध्यम से 30 प्रतिशत भूमि पर कॉमर्शियल और 70 फीसदी पर रिहायशी अपार्टमेंट बनाएगा। इस 70 फीसदी भूमि पर हजारों की संख्या में फ्लैट बनाए जा सकेंगे।
इसके जरिए एक ओर तो राजधानी की आवासीय समस्याएं दूर होंगी, दूसरी ओर मेट्रो नेटवर्क के संचालन के लिए लगभग 1600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा।
सरकार एलएमआरसी को इसके लिए लगभग 60 हेक्टयेर (लगभग तीन करोड़ वर्ग फीट) भूमि उपलब्ध कराएगी। फिलहाल राजधानी में अनुमन्य अधिकतम 2.50 एफएआर के स्थान पर इस प्रापर्टी के डवलपमेंट के लिए 5 एफएआर अनुमन्य होगा जिससे अधिकतम निर्माण किया जा सकेगा।
इस संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से एक आदेश जारी किया जा चुका है जिसमें इस आशय के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई है। इसके लिए सरोजनी नगर में डिपो से बचने वाली भूमि का उपयोग हो सकता है।
मेट्रो के नार्थ साउथ कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस खर्च में प्रदेश सरकार को एक बड़े हिस्से की दरकार निवेशकों के जरिए भी है।
फाइनेंशियल रिटर्न ऑफ रेवेन्यू (एफआरआर) की जो बढ़ोतरी केंद्र ने करने के लिए कहा था उसके लिए यह विकल्प निकाला गया है। इसमें निवेश आकर्षित करने के लिए इस परियोजना में हाउसिंग स्कीम का कॉन्सेप्ट भी जोड़ा जा रहा है।
इसके लिए प्रदेश सरकार ने फिलहाल 60 हेक्टेयर भूमि एलएमआरसी को देने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह भूमि अलग-अलग हिस्सों में दी जाएगी। यह मेट्रो स्टेशन के नजदीक भी हो सकती है और अलग भी।
एलडीए ने डीएमआरसी को पत्र के जरिए सूचित किया है कि पांच फ्लोर एरिया रेशियो देते हुए यह भूमि दी जाएगी जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 3 करोड़ वर्ग फीट होगा।
इसमें लगभग 90 लाख वर्ग फीट कॉमर्शियल और 2.10 करोड़ वर्ग फीट का आवासीय योजना के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
एक हजार वर्ग फीट का होगा फ्लैट
पांच एफएआर का जो फॉर्मूला है उसमें अगर 2.10 करोड़ वर्ग फीट भूमि पर एक हजार वर्ग फीट की औसत क्षेत्रफल वाले फ्लैट बनाए जाएंगे तो एक लाख फ्लैटों का निर्माण किया जा सकेगा।
इन फ्लैटों को बेच कर निवेशक बड़ा लाभ कमाएगा। जबकि इससे पहले वह एलएमआरसी को 1600 करोड़ रुपये की मदद करेगा। यह मदद ऋणों के भुगतान और अन्य खर्चों के तौर पर होगी।
इसके अलावा लाभ के आधार पर प्रत्येक वित्त वर्ष में पांच प्रतिशत लाभ का भुगतान भी वह एलएमआरसी को बतौर रेंटल वैल्यू में करेगा।
डिपो के पास सबसे अधिक भूमि उपलब्ध
इस प्रयोजन के लिए सबसे अधिक भूमि प्रस्तावित डिपो के पास उपलब्ध है। यहां पर ही हाउसिंग स्कीम लाई जा सकती है।
फिलहाल जिला प्रशासन ने 32वीं वाहिनी पीएसी के पास मेट्रो मदर डिपो के लिए 80 एकड़ (करीब 32 हेक्टेयर) जमीन फाइनल कर दी है।
इस भूमि में 50 एकड़ पर डिपो बनेगा, जबकि 30 एकड़ का इस्तेमाल लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अपनी हाउसिंग स्कीम के लिए कर सकता है।
इसके अतिरिक्त इसके पास ही और जमीन का अधिग्रहण भी मेट्रो के लिए किया जा सकेगा। कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए मेट्रो स्टेशनों की भूमि का उपयोग किया जाएगा।
यह एक बेहतरीन प्रस्ताव है। इसके जरिए मेट्रो परियोजना के लिए धन जुटाया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को आशियाना भी मिलेगा। यह जमीन बढ़ भी सकती है और घट भी सकती है। इसके साथ ही एफएआर भी घट और बढ़ सकता है। मगर इसको अपनाया जाएगा।
राजीव अग्रवाल, चेयरमैन मेट्रो सेल