मेट्रो के निर्माण कार्य और इसके चलते ट्रैफिक जाम लखनऊ की हवा को जहरीली बना रहा है। वहीं हरियाली की कमी इसमें इजाफा कर रही है। सितंबर और अक्तूबर में शहर के नौ इलाकों में वायु की गुणवत्ता जांची गई थी।
आईआईटीआर की पोस्ट-मानसून रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें आलमबाग की हवा सबसे अधिक जहरीली पाई गई है। दूसरे स्थान पर चारबाग है। जबकि रिहायशी इलाकों में इंदिरानगर सबसे अधिक प्रदूषित है।
इन इलाकों की हवा में सूक्ष्मकणों और हैवी मेटल्स पाए गए हैं, जो अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की बीमारी के साथ ही कैंसर और हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ावा दे रहे हैं।
आलगबाग और चारबाग की हवा में सूक्ष्म कणों और हैवी मेटल्स के स्तर में पिछले साल के मुकाबले जबर्दस्त वृद्धि हुई है। पिछले साल चारबाग सबसे प्रदूषित था। इस बार दूसरे स्थान पर होने के बावजूद यहां की स्थिति बदतर ही हुई है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि मेट्रो के निर्माण कार्य की वजह से हवा में धूल के कण घुल रहे हैं। वहीं ट्रैफिक जाम के चलते गाड़ियों से निकलने वाला धुआं हवा को जहरीला बना रहा है। आलमबाग में सूक्ष्मकण पीएम-10 का अधिकतम स्तर 349.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमी .पाया गया। चारबाग में यह आंकड़ा मामूली सा कम 341.4 माइक्रोग्रा म प्रति घनमी. मिला।