अब इन्हें पता चल रहा है कि उनका कनेक्शन प्रीपेड हो गया है। विभाग ने उपभोक्ताओं के मोबाइल पर कनेक्शन को प्रीपेड किए जाने के मेसेज भेजे थे, मगर यह स्पष्ट नहीं किया कि अब उनको बिल नहीं भरना है, बल्कि अकाउंट रिचार्ज कराते हुए बिजली इस्तेमाल करनी है।
नहीं बंद हुई किसी की बिजली
कायदे से जिन प्रीपेड उपभोक्ताओं के अकाउंट रिचार्ज नहीं हुए और उन्होंने बिल के इंतजार में भुगतान भी नहीं किया, उनकी बिजली बंद हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। रिचार्ज न कराने पर भी उपभोक्ताओं की बिजली कटी नहीं, क्योंकि राजधानी में कुछ ही समय पहले वर्टिकल व्यवस्था लागू हुई है। ऐसे में जीरो बैलेंस वाले उपभोक्ताओं की बिजली बंद करने पर अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया।
उपभोक्ताओं का लेखा-जोखा
| जोन |
कुल |
स्मार्ट मीटर वाले |
प्रीपेड धारक |
| अमौसी |
5.50 लाख |
66,000 |
46,192 |
| लखनऊ मध्य |
3.15 लाख |
60,500 |
35,500 |
| जानकीपुरम |
3.20 लाख |
29,550 |
24,246 |
| गोमतीनगर |
2.32 लाख |
30,272 |
23,984 |
| कुल |
14.17 लाख |
1,86,322 |
1,29,922 |
जितना रिचार्ज करेंगे, उतनी बिजली जलाएंगे
जितने भी उपभोक्ता प्रीपेड हो चुके हैं, उनके घर अब कोई मीटर रीडर रीडिंग करने नहीं जाएगा। ऐसे उपभोक्ता जितने का रिचार्ज करेंगे, उतनी बिजली जलाएंगे। ऐसे उपभोक्ताओं के मोबाइल पर उपयोग की जाने वाली बिजली के खर्च का मेसेज भेजा जा रहा है।
- योगेश कुमार, निदेशक (वाणिज्य) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ