सूत्रों का कहना है कि इस मामले में लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की भूमिका अहम रही है।
2007 से 2012 के बीच बसपा सरकार में लखनऊ और नोएडा में बने स्मारकों में हुए घोटाले के मामले में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी इसी हफ्ते विजिलेंस के सामने पेश होंगे।
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इस मामले की जांच कर रहे विवेचक ने सवालों की लंबी फेहरिस्त तैयार की है। इसके लिए 50 से अधिक फाइलों का बारीकी से अध्ययन किया गया है। जिसके बाद सवालों की सूची तैयार की गई है। इन पूर्व मंत्रियों से पूछताछ के बाद संबंधित अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की भूमिका अहम रही है।
इस घोटाले की जांच 2012 में लखनऊ पुलिस ने शुरू की थी। बाद में लोकायुक्त ने भी इसकी जांच की और विजिलेंस से जांच की सिफारिश की थी। विजिलेंस ने गोमतीनगर थाने में एक जनवरी 2014 को एफ आइआर दर्ज कराई थी। इस घोटाले में अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।