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राम मंदिर को लेकर संतों की बैठक में हो सकता है बड़ा एलान, विहिप बोली- आखिर हम कब तक प्रतीक्षा करें

Sun, 23 Sep 2018 11:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : demo pic
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संतों-धर्माचायों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की 5 अक्तूबर को दिल्ली में बैठक होने जा रही है। इसमें अयोध्या मुद्दे पर आंदोलन या कारसेवा को लेकर कोई बड़ा फैसला हो सकता है। इसके  लिए विहिप प्रमुख संतों को पत्र भेजने के साथ व्यक्तिगत रूप से भी संपर्क कर रही है। समिति में देश के सभी प्रमुख अखाड़ों और हिंदुत्व की पीठों के प्रमुख संत शामिल हैं। 
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विहिप ने कहा, मंदिर निर्माण को लेकर हिंदुओं का धैर्य अब जवाब देता जा रहा है। विहिप भी आखिर कब तक प्रतीक्षा करे ? इस बैठक को पूर्व विहिप अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया के 21 अक्तूबर को अयोध्या कूच के एलान से उत्पन्न दबाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

विहिप ने संतों को भेजे पत्र में लिखा है- आपके श्रीचरणों को विदित है कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का आंदोलन पूज्य संतों के नेतृत्व में विहिप कार्यकर्ता 1984 से चला रहे हैं। आंदोलन के विविध चरण जैसे राम जानकी यात्रा, शिला पूजन, शिलान्यास, पादुका पूजन, पहली और दूसरी कारसेवा हो चुकी है।
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अगले साल प्रयागराज में कुंभ मेला है। वहां धर्म संसद का आयोजन 31 जनवरी और 1 फरवरी को होगा। उसके बाद लोकसभा के चुनाव होंगे। यह कहा गया था कि मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार कानून बनाएगी या कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा। यद्यपि रामजन्मभूमि का विषय कोर्ट का नहीं बल्कि आस्था का है। 

हाईकोर्ट से अपने पक्ष में फैसला आने के बावजूद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ऐसा लग रहा था कि सितंबर 2018 तक निर्णय आ जाएगा। पर, अब यह संभव नहीं लगता। इसलिए संतों का निर्णय जरूरी है। इसके लिए दिल्ली में 5 अक्तूबर 2018 को संत उच्चाधिकार समिति की बैठक का फैसला किया गया है। इसमें आपकी उपस्थिति सादर अनिवार्य है।

ये संत होंगे शामिल

प्रतीकात्मक तस्वीर
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि बैठक राम मंदिर निर्माण की दिशा तय करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने रोज सुनवाई की बात कही थी लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। हाईकोर्ट से फैसला हिंदुओं के पक्ष में आ चुका है। हिंदू समाज की इच्छा है कि जल्द से जल्द प्रभु राम की जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर बने।

भाजपा ने कानून बनाकर मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त करने की बात कही थी। पर, कोई सक्रियता नहीं दिख रही है। ऐसे में आवश्यक है कि संत समाज पूरी स्थिति पर नए सिरे से विचार कर फैसला करे। बैठक में जगद्गुरु शंकराचार्य वासदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु माधवाचार्य विश्वेषतीर्थ उडुपी, श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि, स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी अवधेशानंद, स्वामी हंसदेवाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य सहित अन्य कई संत हिस्सा लेंगे।

संघ प्रमुख ने भी कहा था, जल्द बने मंदिर 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दो दिन पहले अयोध्या मुद्दे के जल्द समाधान की इच्छा जताई थी। कहा था- इससे हिंदू व मुसलमानों के बीच संबंध बेहतर होंगे और देश में तनाव खत्म होगा। उन्होंने इस पर अध्यादेश का विकल्प भी सुझाया था लेकिन यह भी कहा था कि उन्हें नहीं पता कि ऐसा संभव है या नहीं। पर, वह  एक स्वयंसेवक, संघ प्रमुख और  मंदिर आंदोलन के एक हिस्से के रूप में अयोध्या में जल्द से जल्द मंदिर निर्माण चाहते हैं। माना जा रहा कि उच्चाधिकार समिति की बैठक बुलाने के पीछे तोगड़िया और अन्य संगठनों का दबाव व संघ प्रमुख की इच्छा है।
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कहीं यह कारण तो नहीं

अयोध्या
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विहिप और संघ परिवार की दूरगामी रणनीति है। लोकसभा चुनाव आने के साथ संघ परिवार को यह आशंका सताने लगी है कि इस चुनाव में मंदिर मुद्दा उनके लिए समस्या खड़ी कर सकता है। भगवा टोली को नुकसान का खतरा दिखने लगा है। इसीलिए इस बैठक और जनवरी में हो रहे कुंभ में धर्मसंसद के सहारे इस मुद्दे को फिर गरमाने की तैयारी है ताकि उसकी साख बची रहे और हिंदुत्व के एजेंडे को धार देकर चुनावी माहौल भी बनाया जा सके।

डेढ़ लाख लोग करेंगे अयोध्या कूच
डॉ. प्रवीण तोगड़िया के संगठन अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री वेद सचान का कहना है कि लोकसभा चुनाव नजदीक होने के कारण ऐसी बातें हो रही हैं। पर, हिंदू समाज अब आश्वासन नहीं निर्णायक घोषणा चाहता है। उनका संगठन अयोध्या कूच को लेकर लगातार संपर्क कर रहा है। 21 अक्तूबर को लगभग डेढ़ लाख लोग अयोध्या जाएंगे और 23 को वहां पहुंचकर केंद्र सरकार से संसद से कानून बनाकर मंदिर निर्माण का रास्ता खोलने की मांग करेंगे। यह चेतावनी भी देंगे कि सरकार ने यदि कानून नहीं बनाया तो वे चुनाव में भाजपा का विरोध करेंगे। 
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