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Lucknow News: बलरामपुर अस्पताल में मेडिकोलीगल संकट गहराया

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बलरामपुर अस्पताल।
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लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट न होने से मेडिकोलीगल मामलों को निपटाने में गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग में प्रतिदिन चार से पांच हजार मरीज आते हैं। डॉक्टर 100 से 120 मरीजों को अल्ट्रासाउंड और 40 से 50 मरीजों को सीटी स्कैन कराने की सलाह देते हैं। अस्पताल में जांच के लिए दो रेडियोलॉजिस्ट सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति पर तैनात हैं। फिलहाल इन्हीं दोनों पर जांच करने का जिम्मा है। अस्पताल में तैनात स्थायी रेडियोलॉजिस्ट का बीते दिनों बीमारी के कारण निधन हो गया था।
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मेडिकोलीगल जांच में अड़चन
अस्पताल में प्रतिदिन पांच से अधिक मेडिकोलीगल जांच के लिए आते हैं। इनमें चोट, दुर्घटना और अन्य आपराधिक मामलों से संबंधित रिपोर्ट शामिल होती हैं। रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में इन महत्वपूर्ण जांचों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। इससे न केवल मरीजों को परेशानी हो रही है, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में भी देरी हो रही है। पुलिस और अन्य संबंधित विभागों को भी रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
सेवा देने के लिए राजी नहीं हुए संबद्ध किए गए रेडियोलॉजिस्ट
इस समस्या के समाधान के लिए अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने इसी माह रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शशिकांत को बलरामपुर अस्पताल से संबद्ध किया था। 23 दिन बीतने के बाद भी वह यहां सेवा देने के लिए राजी नहीं हुए हैं। अस्पताल के निदेशक डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि संबंधित रेडियोलॉजिस्ट को फोन करके बुलाया गया है। पूरे मामले से अपर निदेशक को भी अवगत कराया गया है।
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चार पद हैं स्वीकृत
बलरामपुर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के चार पद स्वीकृत हैं। इन स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में एक भी स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इस पद पर स्थायी नियुक्ति न होने से मेडिकोलीगल रिपोर्ट तैयार करने में लगातार अड़चन आ रही है। इन रिपोर्टों का समय पर मिलना न्याय प्रक्रिया के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्थायी विशेषज्ञ की कमी से अस्पताल की सेवाएं और कानूनी प्रक्रियाएं दोनों प्रभावित हो रही हैं।
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