केजीएमयू और डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान तक भी दवा घोटाले की जांच की आंच।
लखनऊ। एसजीपीजीआई के हॉस्पिटल रिवाल्विंग फंड के तहत कार्यरत न्यू ओपीडी फार्मेसी में हुए दवा घोटाले की जांच की आंच केजीएमयू और लोहिया संस्थान तक भी पहुंच सकती है।
केजीएमयू और लोहिया संस्थान में मेडिकल स्टोरों का संचालन एसजीपीजीआई के एचआरएफ टेंडर के तहत हो रहा है। हालांकि केजीएमयू में करीब तीन साल से एचआरएफ की नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया कराने की तैयारी चल रही है। लेकिन अभी तक यह व्यवस्था परवान नहीं चढ़ पाई है। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी में निजी मेडिकल स्टोर का भी संचालन हो रहा है। इन दोनों संस्थानों में भी पीएम सीएम सहित विभिन्न कोष से आने वाले रुपयों से एचआरएफ खाते में रुपये भेजे जाते हैं। ऐसे में दोनों जगह एसजीपीजीआई जैसे घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों संस्थानों के अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बार अधिक डिमांड वाली सर्जिकल सामग्री संबंधित कंपनी एसजीपीजीआई के सेंट्रल ड्रग स्टोर से केजीएमयू और लोहिया संस्थान को पहुंचाती रही है। इसमें भी हेरा फेरी का अंदेशा जताया जा रहा है।
केजीएमयू में पीएम सीएम कोष के तहत आने वाले रुपयों से दवा खरीद मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से हो चुकी है। वर्ष 2019 में अंबेडकर नगर निवासी विशाल सिंह ने पूरे मामले की शिकायत की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से 14 जनवरी 2020 को केजीएमयू प्रशासन से पूरे मामले में जवाब मांगा गया। केजीएमयू प्रशासन ने जांच कमेटी बनाने की दुहाई दी, लेकिन इस मामले को निपटा दिया गया। इतना ही नहीं पीएम सीएम कोष से इलाज कराने वाले मरीजों इप्लांट का बकाया होने की वजह से विभिन्न कंपनियों ने सामग्री देने से भी इनकार कर दिया था। केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को जांच कराकर विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई थी। एचआरएफ का नए सिरे से टेंडर कराने की प्रक्रिया चल रही है।