यूपी दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया का कहना है कि नई नीति में बेहतरीन प्रावधान किए गए हैं। इससे प्रदेश में दवा उद्योग को तो बढावा मिलेगा, लेकिन प्रदेश की दवा निर्माता इकाइयों के विकास पर भी ध्यान देना होगा। टर्न ओवर की बाध्यता खत्म करना जरूरी है। इससे यहां तैयार होने वाली दवाएं प्रदेश के मरीजों को सस्ते दर पर मिल सकेंगी।
मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को लेना है फैसला
प्रमुख सचिव खाद्य एवं औषधि प्रशासन अनीता सिंह का कहना है कि फार्मा नीति में नई इकाइयों के लिए सहूलियतें दी गई हैं। पहले से चलने वाली इकाई अलग से नया निवेश करती हैं तो उन्हें भी छूट दी जाएगी। जहां तक दवा खरीद का मामला है तो दवा निर्माताओं की समस्या से स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया जा चुका है। उसमें मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को फैसला लेना है।
नियमावली के अनुसार ही हो रही खरीद
प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन जगदीश का कहना है कि दवाओं की खरीद कारपोरेशन की नियमावली के अनुसार की जा रही है। उसमें 20 करोड़ के सालाना टर्न ओवर की बाध्यता लगाने के कई वजह है। छोटी कंपनियां टेंडर में हिस्सा लेती हैं, लेकिन समय से दवा आपूर्ति नहीं कर पाती है। फिर भी दवा निर्माताओं की मांग को देखते हुए लघु एवं मध्यम दवा कारोबारियों को बढ़ाने, उन्हें सहूलियत देने की प्रक्रिया चल रही है।