अलोक कुमार का कहना है कि ज्यादा जांच होने से संक्रमण का जल्दी पता लगाया जा सकेगा और इसे नियंत्रित करने में आसानी होगी। साथ ही मरीजों की जांच के बाद आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इसीलिए केजीएमयू, आरएमएल, एसजीपीजीआई, जिम्स नोएडा और मेरठ मेडिकल कॉलेज में रोजाना 12,000 जांच होनी है।
रिम्स सैफई, एसएसपीएच ग्रेटर नोएडा, बीआरडी गोरखपुर, मेडिकल कालेज प्रयागराज, झांसी, कानपुर, आगरा में रोजाना 8000 जांच होनी है। इसके अलावा मेडिकल कालेज आजमगढ, कन्नौज, अम्बेडकरनगर, बांदा, बदायूं, सहारनपुर, जालौन और स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अयोध्या, बस्ती, बहराइच, फिरोजाबाद और शाहजहांपुर में रोजाना 4000 सैम्पल की जांच होनी है।
24 संस्थानों में 28 करोड़ से ज्यादा की आएंगी मशीनें
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने केजीएमयू, आरएमएल, एसजीपीजीआई, जिम्स नोएडा, रिम्स सैफई, एसएसपीएच ग्रेटर नोएडा, मेरठ मेडिकल कॉलेज, बीआरडी गोरखपुर, प्रयागराज, झांसी, कानपुर, आगरा, आजमगढ, कन्नौज, अम्बेडकरनगर, बांदा, बदायूं, सहारनपुर, जालौन और स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अयोध्या, बस्ती, बहराइच, फिरोजाबाद और शाहजहांपुर में जांचें बढ़ाने के लिए संसाधनों में भी वृद्धि के आदेश दिए हैं।
इन संस्थानों में 12 करोड़ 45 लाख की 83 आरटीपीसीआर मशीनें, 14 करोड़ की 35 सेमी ऑटोमैटिक एक्सट्रैक्टर और एक करोड़ 61 लाख की 23 बायो सेफ्टी कैबिनेट खरीदी जाएंगीं। इसके अलावा करीब सवा चार करोड़ की लागत से 29 आटो क्लेव, 29 डीप फ्रिजर 80 डिग्री, 29 डीप फ्रीजर 20 डिग्री और 29 फ्रीज भी खरीदी जाएगी। जांच बढ़ने से संसाधनों के साथ मैनपावर भी बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए 558 साइंटिस्ट, लैब टेक्निशियन, डेटा आपरेटर और लैब अटेंडेंट भी रखे जाएंगे। इन पर हर महीने 52 लाख से अधिक मानदेय के रूप में खर्च आएगा।