आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग पर सवाल
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग के बजाय सरकारों को गरीबी उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारें गरीबी उन्मूलन की योजनाओं पर हर वर्ष बड़ी राशि खर्च करती हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और सरकारी व्यवस्था की कमियों के कारण जरूरतमंदों तक उसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता।
मायावती ने आर्थिक आधार पर लागू आरक्षण की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका अपेक्षित लाभ गरीब सवर्ण परिवारों को नहीं मिल पा रहा है और इसमें छलावा अधिक दिखाई देता है।
सरकारी व्यवस्था पर लगाया जातिवादी होने का आरोप
बसपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट और जातिवादी सरकारी व्यवस्था ने आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को सही तरीके से जमीन पर लागू नहीं होने दिया। उनका कहना है कि इसी वजह से एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लोग आजादी के लंबे समय बाद भी गरीबी, जातीय द्वेष, शोषण, अत्याचार और भेदभाव का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने सभी सरकारों से अपील की कि आरक्षण विरोधी तत्वों को किसी प्रकार का संरक्षण या शरण न दी जाए। साथ ही लोगों से आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति नहीं करने और न ही उसे बढ़ावा देने की नसीहत दी।
राहुल गांधी के धरने को लेकर भी उठाए सवाल
मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धरने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उसी दिन पार्लियामेंट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर राहुल गांधी कई घंटे धरने पर बैठे। इस पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं थी।
मायावती के मुताबिक, इसके ठीक बगल में जंतर-मंतर पर दलित और शोषित वर्गों को जातीय आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण को खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी या उनके किसी कांग्रेसी साथी ने वहां जाकर प्रदर्शनकारियों को समझाने तक की कोशिश नहीं की। मायावती ने इसे इन वर्गों के प्रति कांग्रेस की आरक्षण विरोधी मानसिकता का संकेत बताया।