मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक के मामले में बसपा सुप्रीमों मायावती काफी दिन तक चुप्पी साधे रहीं। उनका बयान तब भी नहीं आया जब मुस्लिम महिलाएं सुप्रीमकोर्ट पहुंच गईं। वे तब भी नहीं बोलीं जब सुप्रीमकोर्ट में केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ अपनी राय दे दी।
वे तब बोलीं, जब सपा में सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महोबा की खुली रैली में तीन तलाक पर मुस्लिम महिलाओं का साथ देने का एलान कर दिया।
माना जा रहा है कि भाजपा के साथ खड़ी न नजर आने और थोक मुस्लिम वोटों को सहेजने के चक्कर में मायावती तीन तलाक की विरोधी मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ी नहीं हो पाईं।
दलित चितंकों का मायावती के स्टैंड पर अलग-अलग नजरिया है। विश्लेषक बताते हैं कि सूबे के आम मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी के साथ अपने को ज्यादा जुड़ा हुआ पाता है।
लेकिन मायावती का 2017 के विधानसभा चुनाव का पूरा गणित ही मुस्लिमों के साथ पर टिका हुआ है। बेस दलित वोट बैंक में भाजपा की सेंधमारी से बेचैन बसपा किसी भी कीमत पर मुस्लिमों का पूरा साथ चाहती हैं।
इसीलिए वह कई प्रत्याशियों का टिकट काटकर मुस्लिमों को दे चुकी हैं। वह यह भी कह चुकी हैं कि जितने मुसलमानों को बसपा ने टिकट दिया है, उतना सपा देकर तो दिखाए। संकेत है कि बसपा 100 से ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में उतार सकती है।