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माया के तरकश में तीन नए तीर, सब होंगे ढेर!

Wed, 30 Apr 2014 10:31 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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सूबे में चुनाव के बाकी चरणों के लिहाज से बसपा अध्यक्ष मायावती ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर अपने चुनावी तरकश में कुछ नए मुद्दों को शामिल कर लिया है।
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इसमें दलितों का बिखराव रोकने के लिए उन्हें हिंदुओं से अलग बताने, नरेंद्र मोदी द्वारा पिछड़ी जातियों के ध्रुवीकरण की कोशिश को थामने के लिए पिछड़े वर्ग की उनकी जाति पूछने और डॉ. अंबेडकर को धर्मनिरपेक्ष संविधान बनाने का श्रेय देकर मुस्लिमों को अपने पाले में खड़े करने की रणनीति शामिल की है।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से इस बात की चर्चा ज्यादा तेज हुई है कि दलित वोटरों के एक हिस्से का झुकाव भाजपा की ओर हो रहा है और मुस्लिमों के बीच डॉ. अंबेडकर की मुस्लिम विरोधी छवि पेश की जा रही है।
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भाजपा पिछड़ा वर्ग विरोधी

मायावती को पार्टी से पिछड़ी जातियों के भी बिखराव का अंदेशा पैदा हुआ है। यही वजह है कि उन्होंने डैमेज कंट्रोल की योजना के तहत चुनावी जनसभाओं में तीन मुद्दों को धार देना शुरू कर दिया है। पहला, वह दलितों को हिंदुओं से अलग बता रही हैं।

दूसरा, भाजपा को पिछड़ा वर्ग विरोधी साबित करती हैं और मोदी को पिछड़ा नेता की जगह पिछड़ों की एक जाति के रूप में सामने लाने के लिए पिछड़ों में उनकी जाति पूंछ रही हैं।

तीसरा, मुस्लिमों को अपने पाले में लाने के लिए अंबेडकर के मुस्लिम विरोधी साबित करने की मुहिम की हवा निकालते हुए उन्हें इतिहास का पाठ पढ़ा रही हैं। बता रही हैं कि डॉ. अंबेडकर ने हिंदुत्व के आधार पर संविधान नहीं बनाया।

दलित हिंदुओं से अलग हैं

मायावती अपनी जनसभाओं में यह बताना नहीं भूलती कि भाजपा वाले दलित बस्तियों में जाकर दलितों को हिंदू कहकर गुमराह कर रहे हैं।

बताती हैं कि किस तरह डॉ. अंबेडकर ने दलितों के साथ दोयम दर्जे के व्यवहार से क्षुब्ध होकर 14 अक्तूबर 1956 को हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी।

वह दलितों को समझाती हैं कि छुआछूत व जातिपात का बर्ताव कर उनके साथ नफरत न की गई होती तो दलित हिंदुओं से अलग क्यों होते?

संविधान हिंदुत्व आधारित नहीं

मायावती का चुनावी समीकरण ही ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित (बीएमडी) फार्मूले पर टिका है। उनको जबसे जानकारी मिली कि भाजपा मुसलमानों के बीच डॉ. अंबेडकर को मुस्लिम विरोधी बताने की कोशिश कर रही है, वह बेहद आक्रामक हो उठी हैं।

आरोप लगा रही हैं कि इस तरह का प्रचार मुसलमानों को बसपा से दूर रखने के लिए भाजपा की रणनीति है। दलितों व मुसलमानों को वह बसपा से दूर करना चाहती है।

फिर मायावती मुसलमानों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए विस्तार से समझाती हैं कि डॉ. अंबेडकर मुस्लिम विरोधी होते तो धर्मनिर्पेक्ष संविधान क्यों बनाते?

वह यह भी बताना नहीं भूलती कि बसपा ही है जिसके राज में कोई दंगे नहीं होते। मुस्लिमों को सबसे ज्यादा टिकट भी बसपा ही देती है।

मोदी की ‌जाति पूछी

पूर्वांचल व अवध की जिन सीटों पर चुनाव बाकी है उनमें पिछड़ों का बड़ा रोल रहता है। इस अंचल में जातीय जाल का जंजाल इतना गहरा समाया हुआ है कि राजनीतिक दलों ने पिछड़ा वर्ग में तो जातिवार नेता तैयार कर दिए हैं।

शायद यही वजह है कि जब मोदी प्रदेश में पिछड़ी जातियों के वोट को गोलबंद करने के लिए अपने को पिछड़ा के रूप में पेश करते हैं तो मायावती उनसे सीधा सवाल करती हैं कि वह यह क्यों नहीं बताते हैं पिछड़ों में किस जाति से हैं?

इसी बहाने वह यह भी बताती हैं कि भाजपा मंडल आंदोलन व आरक्षण विरोधी है। आडवाणी की रथ यात्रा तो बहाना थी, उसने मंडल आंदोलन व आरक्षण विरोध की वजह से वीपी सिंह की सरकार गिराई।

बसपा की जीत का फार्मूला

मायावती का कहना है कि ‘बसपा के पास हर लोकसभा सीट पर करीब 2.5 लाख वोट हैं। पार्टी ने ब्राह्मणों को सर्वाधिक 21 टिकट दिए, इसलिए अपरकास्ट के भी वोट काफी तादाद में मिल रहे हैं।

आज कांग्रेस जीतने की स्थिति में नहीं है। सपा की हालत बहुत खराब है। ऐसे में यदि मोदी को केंद्र की सत्ता में आने से रोकना है तो वोट बंटना नहीं चाहिए।

यदि मुस्लिम थोड़ा कांग्रेस, थोड़ा सपा और थोड़ा भाजपा के पास गए तो फिर इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा।

बसपा नेताओं की जनसभाओं में जिस तरह भीड़ जुट रही है, स्पष्ट संकेत है कि इस चुनाव में बाकी पार्टियों से बेहतर प्रदर्शन करेगी।’
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अंबेडकर ने बनाया धर्मनिरपेक्ष संविधान

मायावती ने कहा कि ‘भाजपा मुसलमानों को बसपा से अलग करने के लिए उन्हें बरगला रही है। कह रहे हैं कि अंबेडकर मुस्लिम विरोधी थे। यह गलत है। बाबा साहब मुस्लिम विरोधी नहीं थे। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष संविधान बनाया। हिंदुत्व के आधार पर संविधान नहीं बनाया।’

वहीं लखनऊ की सभा में मायावती ने कहा था कि ‘बीजेपी दलित बस्तियों में जाकर यह कहकर गुमराह कर रही है कि दलित-हिंदू भाई हैं। हमारे साथ चलना चाहिए। हिंदुओं का ध्यान बीजेपी ही रखती है।

बीजेपी वाले बताएं यदि छुआछूत जातिपात का बर्ताव न किया होता तो, आपसे नफरत न करते, अलग क्यों होना पड़ता। चुनाव के मौके हिंदू कहकर गुमराह करते हैं, बाद में बस्ती में घुसने भी देना पसंद नहीं करते। खुद भी दलित बस्तियों में जाना पसंद नहीं करते। जाते हैं तो मुंह में कपड़ा लगाकर जाते हैं।’

इलाहाबाद की सभा में मायावती ने कहा था कि ‘मोदी जहां भी जाते हैं, कहते हैं कि मैं पिछड़ी जाति का हूं। आप हमें वोट दीजिए। इस तरह से कहकर वह हमारे वोट को अपने पार्टी में ले जा रहे हैं। मोदी से मैं पूछती हूं कि पिछड़ा वर्ग में वह किस जाति के हैं?’
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