बसपा ने पहले तो गठबंधन के तहत इस बार पिछले चुनाव में ब्राह्मण प्रत्याशियों वाली अपनी तीन सीटें कन्नौज, झांसी व गाजियाबाद सपा तथा मथुरा रालोद के हिस्से में छोड़ दी। बाकी जो दो सीटें फतेहपुर सीकरी व अकबरपुर बचीं, उनमें से केवल फतेहपुर सीकरी में ही ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा।
वहां भी पार्टी ने पहले क्षत्रिय प्रत्याशी राजवीर सिंह को उतारा था लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के बाद नामांकन के अंतिम दिन पूर्व विधायक श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित को टिकट दे दिया। इस तरह 17 सीटों में अंतिम वक्त केवल एक सीट ब्राह्मण के हिस्से में आई।
बसपा ने पिछली बार सहारनपुर, अलीगढ़, फिरोजाबाद व फर्रुखाबाद में क्षत्रिय प्रत्याशी उतारे थे। इस बार पार्टी ने फिरोजाबाद सीट सपा को गठबंधन में दे दी है। बाकी तीन सीटें बसपा के ही हिस्से में हैं। ब्राह्मण की तरह ही बसपा ने केवल एक ही क्षत्रिय उम्मीदवार अभी तक मैदान में उतारा है। हमीरपुर से दिलीप कुमार सिंह प्रत्याशी बनाए गए हैं।
फतेहपुर सीकरी--सीमा उपाध्याय
मथुरा--योगेश द्विवेदी
कन्नौज--निर्मल तिवारी
गाजियाबाद--मुकुल उपाध्याय
अकबरपुर--अनिल शुक्ला वारसी
झांसी--अनुराधा शर्मा
2019 में ब्राह्मण प्रत्याशी
फतेहपुर सीकरी--श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित
2014 में बसपा से क्षत्रिय प्रत्याशी
सहारनपुर--जगदीश राणा
अलीगढ़--अरविंद सिंह
फिरोजाबाद--विश्वदीप सिंह
फर्रुखाबाद--जयवीर सिंह
2019 में क्षत्रिय प्रत्याशी
हमीरपुर--दिलीप कुमार सिंह
बसपा के प्रत्याशियों को देखने से साफ नजर आता है कि पार्टी गठबंधन के सहारे अपने छिटकते बेस वोट को बचाने पर फोकस कर रही है। इसीलिए बसपा सुप्रीमो ने सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग को फिलहाल पीछे छोड़ दिया है। बसपा के सहयोगी दल सपा और रालोद ने अभी तक एक भी ब्राह्मण को उम्मीदवार नहीं बनाया है। सपा को 37 सीटें मिली हैं। पार्टी इनमें से 29 पर प्रत्याशियों का एलान कर चुकी है। इनमें एक भी ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं है।
क्षत्रियों की बात करें तो सिर्फ गोंडा सीट पर क्षत्रिय उम्मीदवार के रूप में पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को मैदान में उतारा गया है। रालोद के हिस्से में आई तीन सीटों में मुजफ्फरनगर से चौधरी अजित सिंह, जबकि बागपत से उनके पुत्र जयंत चौधरी मैदान में हैं। मथुरा से कुंवर नरेंद्र सिंह को रालोद ने प्रत्याशी बनाया है।