बसपा सुप्रीमो ने आरक्षण पर सपा-कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि ये एससी-एसटी आरक्षण के समर्थन में अपने स्वार्थ व मजबूरी में बोलते हैं। दोनों दल आरक्षण के वर्गीकरण व क्रीमीलेयर को लेकर अभी तक चुप्पी साधे हैं, जो इनकी यह आरक्षण विरोधी सोच दर्शाता है।
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एव॔ पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उन्हें भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताने देने वाले भाजपा विधायक पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने भाजपा विधायक को करारा जवाब देने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का आभार भी जताया है।
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बसपा सुप्रीमो ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि सपा मुखिया ने मथुरा के एक भाजपा विधायक को उनके गलत आरोपों का जवाब देकर बसपा प्रमुख के ईमानदार होने के बारे में सच्चाई को माना है, उसके लिए पार्टी आभारी है। पार्टी को भाजपा के इस विधायक के बारे में ऐसा लगता है कि उसकी अब भाजपा में कोई पूछ नहीं रही है। इसलिए वह बसपा प्रमुख के बारे में अनाप-शनाप बयानबाजी करके सुर्खियों में आना चाहता है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे। यदि वह दिमागी तौर पर बीमार है तो उसका इलाज भी जरूर कराए। वरना इसके पीछे भजपा का कोई षडयंत्र है, यह कहना गलत नहीं होगा। यदि भाजपा अपने विधायक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं करती है तो फिर इसका जवाब पार्टी के लोग अगले विधानसभा चुनाव में उसकी जमानत जब्त करा कर तथा वर्तमान में होने वाले उपचुनावों में भी भाजपा को जरूर देंगे।
सपा-कांग्रेस स्वार्थवश करते हैं आरक्षण का समर्थन
वहीं दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो ने आरक्षण पर सपा-कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि ये एससी-एसटी आरक्षण के समर्थन में अपने स्वार्थ व मजबूरी में बोलते हैं। दोनों दल आरक्षण के वर्गीकरण व क्रीमीलेयर को लेकर अभी तक चुप्पी साधे हैं, जो इनकी यह आरक्षण विरोधी सोच दर्शाता है। लिहाजा इनसे सजग रहना जरूरी है। सपा व कांग्रेस आदि का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा एससी-एसटी विरोधी रहा है। भारत बंद को उनका सक्रिय समर्थन नहीं देना भी यह साबित करता है। वैसे भी आरक्षण संबंधी इनके बयानों से यह स्पष्ट नहीं है कि ये कोर्ट के फैसले के पक्ष में हैं या विरोध में। ऐसी भ्रम की स्थिति क्यों है। सपा, कांग्रेस व अन्य पार्टियां आदि आरक्षण के विरुद्ध फिर से अंदरखाने एक लगती हैं। ऐसे में केवल एससी-एसटी ही नहीं, बल्कि अन्य ओबीसी को भी अपने आरक्षण व संविधान की रक्षा तथा जातीय जनगणना की लड़ाई अपने ही बल पर समझदारी से लड़नी है।