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मसरूर जहां का निधन-

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उर्दू लेखक और साहित्यकार मसरूर जहां का निधन
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नगर की वरिष्ठ उर्दू लेखक और साहित्यकार मसरूर जहां का रविवार सुबह निधन हो गया। आकाशवाणी दिल्ली में बतौर उद्घोषिका जुड़ी उनकी नातिन सायरा मुजतबा ने बताया कि वे 81 वर्ष की थीं। शनिवार रात ब्रेन स्ट्रोक के बाद रविवार सुबह एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। परिवारीजनों ने तालकटोरा स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्र्दें खाक किया। बाराबंकी के फतेहपुर में पैदा हुईं लेखिका हाईस्कूल के आगे तो पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने अपने जीवनकाल में 500 से अधिक उर्दू कहानियों के अलावा कई उपन्यास लिखे। उनकी चुनिंदा कहानियों में हमें जीने दो, ख्वाब दर ख्वाब सफर, कहां हो तुम, अल्लाह तेरी कुदरत, कल की सीता, पुल सीरत, धूप धूप साया, परिंदे का सफर, तेरे मेरे दुख, चराग फूलों का, उपन्यास नई बस्ती, दरद के अलावा, गर्दिशें, प्यार की खुशबू, धूप छांव, आवाज न दो समेत कई कृतियां लिखीं। उन्हें उप्र उर्दू अकादमी, बिहार उर्दू अकादमी समेत कई संस्थाओं की ओर से उन्हेें सम्मानित किया गया था।
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