अगर निर्धारित समय सीमा के भीतर लाभार्थी विवाह प्रमाण पत्र नहीं दे पाता है तो मुख्यालय की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी कि वास्तव में उसकी शादी हुई है या नहीं। अगर पाया जाता है कि गलत तथ्य देकर उसने शादी अनुदान की पहली किस्त हासिल की है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उसे दी गई पहली किस्त भू-राजस्व की तरह ब्याज सहित वसूली जाएगी।
शादी अनुदान के लिए हम जाति व आय प्रमाण पत्र के सत्यापन के साथ-साथ विवाह प्रमाण पत्र भी अनिवार्य करने जा रहे हैं।
-अनिल सागर, निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग