देश के खिलाफ विद्रोह करने, भारत की अखंडता, संप्रभुता और एकता को खंडित करने की साजिश रचने के आरोपी प्रतिबंधित माओवादी संगठन कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सक्रिय सदस्य राजेंद्र मुंडा को सजा सुनाई गई है। एनआईए के विशेष न्यायाधीश हुसैन अहमद अंसारी ने राजेंद्र को दोषी ठहराते हुए नौ साल की कैद और 43 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
गोरखपुर में वर्ष 2010 में दर्ज केस में बताया गया कि प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) और उसके फ्रंटल संगठनों के लोगों की गोरखपुर, कानपुर और प्रयागराज में गिरफ्तारी हुई है। लेकिन, कई अन्य भागने में सफल रहे। लिहाजा, उच्चाधिकारियों ने ऐसे आरोपियों पर नजर रखने का निर्देश दिया।
जेल में बंद आशा से मिलने की कर रहा था कोशिश
बताया गया कि इसी दौरान एसटीएफ की गोरखपुर टीम को पता चला कि संगठन की सदस्य हीरामणि मुंडा उर्फ आशा को गिरफ्तार करके गोरखपुर जेल में रखा गया था। आशा की गिरफ्तारी के समय फरार होने में कामयाब रहा आशा का भाई और संगठन का सक्रिय सदस्य राजेंद्र मुंडा उससे मिलने का प्रयास कर रहा है।
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इस सूचना पर एसटीएफ की टीम ने आरोपी राजेंद्र मुंडा को गोरखपुर के स्टेशन रोड स्थित शनि मंदिर के पास से गिरफ्तार कर लिया। राजेंद्र के पास से माओवादी साहित्य, देश विरोधी गतिविधियों से संबंधित साहित्य और प्रचार सामग्री बरामद कियागया था। राजेंद्र मुंडा ने एसटीएफ को पूछताछ में बताया था कि संगठन के सदस्य बलराज उर्फ बच्चा प्रसाद सिंह और आशा उसके बहन बहनोई हैं, जो कानपुर से गिरफ्तार किए गए और गोरखपुर जेल में बंद हैं।
आशा और बलराज को संगठन के कार्यों में सहयोग देता था
आरोपी ने बताया था कि वह पुलिस से बचकर कानपुर से भाग आया है और वह जेल में बंद अपनी बहन से मिलकर बिहार जाने वाला था। आरोपी आशा और बलराज को संगठन के कार्यों में सहयोग देता था। डेढ़ वर्ष पहले आशा ने संगठन के कार्य करने के लिए उसे नियुक्त करवाया था।