लखनऊ। पिछले पांच वर्षों में लखनऊ और उसके आसपास के क्षेत्र में आम की बागवानी करने वाले आम के घटते निर्यात से परेशान हैं। इसके पीछे घटती पैदावार और भाड़े का दोगुना से ज्यादा बढ़ जाना बड़ी वजह है।
आम बागवान और निर्यातक बताते हैं कि 2017 में योगी सरकार बनी तो किसानों को आम के निर्यात पर प्रति किलो 6 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती थी। 2019 के बाद से यह प्रोत्साहन राशि बंद कर दी गई है। उधर, पिछले साल दुबई का जो किराया 75 रुपये किलो होता था वह अब 160-180 रुपये प्रति किलो हो गया है। वहीं, यूरोप का किराया 200 रुपये से बढ़कर450 रुपये किलो तक हो गया है।
अवध आम उत्पादक एवं बागवानी समिति के अध्यक्ष डॉ रघुवीर सिंह और महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि पिछले साल करीब 2 लाख मीट्रिक टन आम की पैदावार हुई था। इस बार 40-50 फीसदी फसल कम है। लखनऊ और उसके आस पास के जिलों में आम की बागवानी से करीब 500 करोड़ का कारोबार है। इस बार कारोबारियों व निर्यातकों को 200 करोड़ के सीधे सीधे नुकसान की आशंका है
आयातक देशों में तनाव का असर
आम के बड़े आयातक खाड़ी देशों में भी तनाव जारी है। यूरोपीय देशों में कड़े नियमों की वजह से आम के निर्यात पर संकट है। उद्यमी व बागवान संजय कुमार बताते हैं कि यूरोप, अमेरिका, जापान, न्यूजीलैंड, तुर्की व ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर में निर्यात की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
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पिछले सालों में आम के निर्यात की स्थिति
वर्ष- निर्यात
(2020-21)- 120.50 मीट्रिक टन
(2021-22)- 33.3 मीट्रिक टन
(2022-23)- 21.07 मीट्रिक टन
(2023-24)- 20.65 मीट्रिक टन
(2024-25)- 3.975 मीट्रिक टन