शनिवार रात पीड़िता के साथ उसकी बूढ़ी दादी थाने पहुंची तो पुलिस ने मामला संदिग्ध बताते हुए दूसरे दिन आने की बात कहकर टरका दिया। रविवार सुबह जब पीड़िता अपने दादी के संग पहुंची तो पुलिस ने दिनभर थाने पर बैठाए रखा।
इसकी जानकारी पर देर शाम गांव के लोग थाने पहुंचे तो पुलिस ने आननफानन मुकदमा दर्ज कर किशोरी को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा। इस बीच पीड़िता के थाने पहुंचने की जानकारी होते ही आरोपी भी भाग निकला।
पीड़िता और उसकी दादी का आरोप है कि सरोजनीनगर पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं करना चाहती थी। वह शनिवार से ही आरोपी का पक्ष ले रही थी। रविवार को जब काफी देर तक थाने में बैठाए रखा तो कुछ रसूखदारों के दबाव में पुलिस ने पीड़िता को समझौता करने के लिए कहा।
इसके लिए देर शाम तक दबाव बनाया जाता रहा। जब ग्रामीणों ने दबाव बनाया तो पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पीड़िता के परिवारीजनों ने समझौते से इन्कार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। हालांकि, प्रभारी निरीक्षक प्रमेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक, शनिवार देर रात होने के कारण पीड़िता को घर भेजा गया था।
रविवार को मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पर समझौता कराने का आरोप गलत है।