सीआईडी धारावाहिक देखकर हसनगंज के खदरा निवासी अभिषेक तिवारी ने कोचिंग संचालक अर्पित गुप्ता को फंसाने के लिये अपने अपहरण की झूठी साजिश रची थी।
उससे रुपये वसूलने के लिए यह प्लान बनाया था। साइबर क्राइम सेल व हजरतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने अभिषेक को गिरफ्तार कर यह खुलासा किया।
एसपी पूर्वी शिवराम यादव के मुताबिक, अभिषेक कुमार तिवारी नवल किशोर रोड स्थित सीए अर्पित गुप्ता की कोचिंग में काम करता था।
अभिषेक ने क्लास की सीडी को ऑन लाइन और स्टूडेंट से सीधे संपर्क कर बेचना शुरू कर दिया। जब इसकी जानकारी कोचिंग संचालक को हुई तो उसने अभिषेक से पूछताछ की।
अभिषेक ने बताया कि उसने कोचिंग के कंप्यूटर से डाटा चोरी किया है। इसके बाद कोचिंग संचालक ने उसके घर जाकर डाटा बरामद कर लिया।
इसके बाद अभिषेक कुमार अचानक गायब हो गया। उसकी पत्नी ने कोचिंग संचालक पर उसके अपहरण का आरोप लगाया और ठाकुरगंज के बालागंज निवासी कोचिंग संचालक अर्पित गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
कोचिंग संचालक से चाहता था रुपये ऐंठना
आरोपी अभिषेक तिवारी
- फोटो : amar ujala
पुलिस ने कोचिंग संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। उधर अभिषेक के परिवारवाले मुकदमा वापस लेने पर रुपये मांगने लगे। इसी बीच अभिषेक की लोकेशन रायबरेली में मिली।
साइबर क्राइम सेल व हजरतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने अभिषेक तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि झूठे मामले में फंसाकर वह कोचिंग संचालक से रुपये ऐंठना चाहता था।
इंस्पेक्टर हजरतगंज विजय मल यादव का कहना है कि झूठे अपहरण की साजिश में उसकी पत्नी भी शामिल थी। इस मामले में उसकी पत्नी के खिलाफ भी 182 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सीए की कोचिंग के संचालक अर्पित गुप्ता को पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद हिरासत में ले लिया। अर्पित ने डाटा की चोरी के बारे में भी बताया। इसके बावजूद पुलिस कर्मियों ने दो दिन तक गैर कानूनी ढंग से हिरासत में रखा।
छोड़ने के नाम पर 25 हजार रुपये घूस भी ले ली। इस मामले में इंस्पेक्टर हजरतगंज विजय मल यादव ने जांच कराने की बात कही है।
हालांकि घूस लेने वाले पुलिस कर्मियों ने इंस्पेक्टर को देने के नाम पर ही घूस ली थी। अर्पित ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों से भी शिकायत करने की बात कही है।