आदित्य शुक्ला ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वह अपने कमरे में सो रहा था। साढ़े तीन बजे गोली चलने की आवाज आई। जब वह आदित्य देव के कमरे में पहुंचा तो देखा कि निष्ठा खून से लथपथ पड़ी है। पिस्टल आदित्य देव के हाथ में थी। उसने कहा कि वारदात में उसका हाथ नहीं है। उसने सिर्फ पिस्टल छिपाई थी। गोली आदित्य देव ने मारी या धोखे से चली उसको नहीं पता।
सात महीने पहले दी थी पिस्टल
आसिफ ने फरवरी में गोलीकांड को अंजाम दिया था। इसके बाद उसने पिस्टल आदित्य देव को दे दी थी। 15 मार्च को आदित्य व उसके साथियों ने मिलकर एक छात्र पर हमला किया था। तब वह जेल गया था, लेकिन उसके पास से पिस्टल बरामद नहीं हुई थी। न ही पुलिस ने आसिफ वाले केस में पिस्टल की बरामदगी की। मतलब आदित्य देव जेल जाने से पहले पिस्टल ठिकाने लगा गया था। जब 31 अगस्त को जेल से छूटा तो फिर से वह उस पिस्टल को रखने लगा। इसमें पुलिस की बड़ी नाकामी रही है।