महिलाओं की सेहत के लिए लापरवाही देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिलाओं में कुपोषण की वजह से हर साल देश की चार फीसदी जीडीपी को नुकसान पहुंचता है। आज भी महिलाएं परिवार में सबसे बाद में खाना खाती हैं। इसका परिणाम उनके लिए जरूरी पोषक तत्वों की कमी के रूप में सामने आता है।
शनिवार को भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) में वीमेन इन एकेडेमिया, रिसर्च एंड मैनेजमेंट ऑफ फूड सेफ़्टी एंड टॉक्सिकोलोजी (वार्म-फॉस्ट: डबल्यूएआरएम-एफ़ओएसटी) विषय पर आयोजित सम्मेलन के समापन समारोह में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) की निदेशक डॉ. श्रीदेवी अन्नपूर्णा सिंह ने कहा कि पोषक तत्वों को खाने में शामिल करने के लिए काफी शोध और इनको खाद्य पदार्थों में उपयोग कराने का काम वैज्ञानिकों की मदद से हुआ है। लेकिन, आज भी 20 करोड़ महिलाएं व बच्चे देश में कुपोषित हैं। उनकी कार्यक्षमता में कमी की वजह से देश की जीडीपी तक को नुकसान इससे पहुंचता है।
यूपी पुलिस में स्टेट स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम की महानिदेशक रेणुका मिश्रा ने कहा कि ऐसा समाज बनाए जाने की जरूरत है, जहां महिलाएं, युवतियां बाधाओं को पार कर पाएं। यह बेहतर और सुरक्षित समाज बनाने में मददगार होगा। इस दौरान प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद, निदेशक डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, डॉ. भास्कर नारायण, निदेशक आईआईटीआर, डॉ नंदिनी पी शेट्टी व डॉ. स्मृति प्रिया भी मौजूद रहे।