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अप्रत्याशित डोपिंग विवाद से उबरकर इतिहास रचना खास : हरगोविंद सिंह

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अनुराग बाजपेईलखनऊ। भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती टीम के चीफ कोच हरगोविंद सिंह के लिए एशियाई खेलों में सुनील कुमार और नितेश सिवाच का पदक जीतना बेहद खास है। उन्होंने कहा कि पिछला कुछ समय टीम के लिए अच्छा नहीं रहा लेकिन विपरीत परिस्थितियों से उबरकर खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया।
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एशियाई खेलों से ठीक पहले दीपक (67 किग्रा) और दीपांशु (130 किग्रा) के डोपिंग में फंसने से टीम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। इस अप्रत्याशित घटना से अन्य खिलाड़ियों का मनोबल भी प्रभावित हुआ। इसके बावजूद टीम ने हार नहीं मानी और छह की जगह चार खिलाड़ियों के साथ लखनऊ साई सेंटर में नए सिरे से प्रशिक्षण जारी रखने का फैसला किया। खिलाड़ियों को डोपिंग के प्रति जागरूक करने के लिए नाडा की ओर से सेमिनार भी आयोजित किया गया।
अमर उजाला से खास बातचीत में हरगोविंद ने बताया कि खिलाड़ियों ने लखनऊ साई सेंटर में करीब आठ माह तक कड़ी ट्रेनिंग की। फेडरेशन ने विदेशी कोच की सेवाएं उपलब्ध कराईं जिससे प्रशिक्षण का स्तर बेहतर हुआ। उज्बेकिस्तान के ताशकंद में 25 दिन का विशेष कैंप आयोजित किया गया। इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा और इसका फायदा एशियाई खेलों में मिला।
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हरगोविंद ने कहा कि उनके लिए सुनील और नितेश दोनों का प्रदर्शन समान रूप से शानदार रहा। नितेश ने बीते अप्रैल में हुई एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में 97 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों के लिए अपना दावा मजबूत किया था। इसके बाद उन्होंने एशियाई खेलों में भी रजत पदक जीता। भारतीय ग्रीको-रोमन टीम ने एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार दो पदक जीते। 87 किग्रा में सुनील कुमार ने पदक जीता, जबकि 97 किग्रा में नितेश सिवाच ने रजत हासिल किया। चार सदस्यीय टीम की इस सफलता में लखनऊ साई सेंटर में हुई आठ माह की ट्रेनिंग की अहम भूमिका रही।
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