नई व्यवस्था में सबसे बड़ी राहत वाहनों के ट्रांसफर में मिलेगी। इसके लिए एनआईसी विशेष बीटा वर्जन विकसित कर रहा है। इसमें नामांतरण, उत्तराधिकार, वसीयत व मृत्यु के मामलों में दस्तावेज अपलोड करते ही अपने आप मंजूरी मिल जाएगी। एनओसी जारी करने के लिए पुलिस सत्यापन डाटा से व्यवस्था को जोड़ा जा रहा है।
छोटा होगा लर्नर डीएल का वीडियो
लर्नर डीएल के लिए आवेदकों को यातायात नियमों से संबंधित वीडियो देखना होता है। इसका समय 20 मिनट से पांच मिनट करने और इसे वैकल्पिक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पोर्टल पर लॉगिन सेशन जल्द समाप्त होने और डाउनलोडिंग-अपलोडिंग में आ रहीं दिक्कतें दूर करने के लिए सर्वर को अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए यूपीडेस्को और एनआईसी को निर्देशित किया गया है।
नए डीएल के टेस्ट के लिए आवेदकों को परीक्षण केंद्र जाना पड़ेगा। बायोमीट्रिक जांच होगी। डीएल में वाहन श्रेणी के विस्तार (दोपहिया वाहनों से चार पहिया) के लिए। वाहनों में तकनीकी बदलाव करवाने के लिए। विंटेज वाहन के पंजीकरण के लिए।
निर्णय के विरोध में आए अफसर-कर्मचारी
आरटीओ की सभी सेवाएं ऑनलाइन करने से अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका लगभग खत्म हो जाएगी। इस कारण निर्णय के विरोध में कई जिलों में प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में मोटरयान अधिनियम की अवहेलना की जा रही है। नई व्यवस्था में खामियां भी हैं।
- वाहनों की खरीद-फरोख्त क्रेता-विक्रेता की स्वतंत्र सहमति पर होती है। सिर्फ ओटीपी से स्वीकृति दिए जाने से सत्यापन कठिन हो जाएगा।
- जनसेवा केंद्रों के जरिये अंगूठे के निशान और ओटीपी व्यवस्था से अपराध बढ़ने की आशंका है।
- एक मोबाइल नंबर परिवार के कई वाहनों से जुड़ा होता है। पारिवारिक झगड़ों की स्थिति में वाहनों के ट्रांसफर में समस्या होगी।
- अभी नए वाहनों का पंजीकरण डीलर अपनी आईडी से करते हैं, जिसके बाद दस्तावेज आरटीओ की साइट पर भेजे जाते हैं। संबंधित पटल सहायक व पंजीयन अधिकारी भौतिक सत्यापन करने के बाद पंजीयन प्रमाणपत्र जारी करते हैं। स्वचालित स्थिति में मंजूरी मिलने पर डीलर की मनमानी हावी हो सकती है।