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बड़ी सुविधा: खत्म होगी RTO तक की दौड़, वाहनों के ट्रांसफर से लेकर पंजीकरण तक के आवेदन हो जाएंगे स्वतः स्वीकृत

Sun, 19 Jul 2026 11:06 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

नई व्यवस्था में डीएल और वाहन पंजीकरण से जुड़ीं 52 फेसलेस सेवाओं को ऑटो-अप्रूव्ड मोड में लाया जा रहा है। 10 सेवाएं पहले से फेसलेस हैं, जबकि 12 अन्य को हाल ही में मंजूरी दी गई है। बची सेवाओं को भी जल्द ऑटो मोड में लाने की तैयारी है।
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एआई तस्वीर - फोटो : एआई तस्वीर
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विस्तार
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क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने वाहनों के ट्रांसफर से लेकर पंजीकरण तक की सेवाओं को भी अब ऑटो मोड (स्वतः स्वीकृत स्थिति) में कर दिया है। ऐसे में आवेदकों को आरटीओ तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उन्हें सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस सुविधा को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पहले एक जनपद में शुरू किया जाएगा। सफलता मिलने पर प्रदेशभर में लागू किया जाएगा।

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उधर, आरटीओ के अधिकारी और कर्मचारी अभी से इस निर्णय के विरोध में आ गए हैं। 20 जुलाई को शासन की मामले पर बैठक होगी। इससे पहले ही अधिकारियों और कर्मचारियों ने रविवार को बैठक बुलाई है।

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नई व्यवस्था में डीएल (सारथी पोर्टल) और वाहन पंजीकरण (वाहन पोर्टल) से जुड़ीं 52 फेसलेस सेवाओं को ऑटो-अप्रूव्ड मोड में लाया जा रहा है। 10 सेवाएं पहले से फेसलेस हैं, जबकि 12 अन्य को हाल ही में मंजूरी दी गई है। बची सेवाओं को भी जल्द ऑटो मोड में लाने की तैयारी है। शासन की मंशा के अनुरूप आरटीओ को पासपोर्ट कार्यालयों की कार्यप्रणाली के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसके लिए उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) मेरठ की रिपोर्ट के आधार पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा।

दलालों पर कसेगी नकेल
दावा है कि नई व्यवस्था से आरटीओ में दलालों पर नकेल कसने के साथ भीड़ भी कम होगी। गड़बड़ी रोकने के लिए पुष्टि संबंधी ओटीपी सिर्फ आवेदक के पंजीकृत मोबाइल पर ही जाएगा।

- आवेदकों का सत्यापन आधार, पैन, डीएल आदि से होगा। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने एनआईसी को पत्र लिखकर तय समयसीमा में तकनीकी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए कहा है।

- इन सभी सुधारों, बीटा वर्जन की लॉन्चिंग और प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के लिए राजस्व परिषद के सभागार में बैठक बुलाई गई है।

वाहनों के ट्रांसफर में सबसे बड़ी राहत

नई व्यवस्था में सबसे बड़ी राहत वाहनों के ट्रांसफर में मिलेगी। इसके लिए एनआईसी विशेष बीटा वर्जन विकसित कर रहा है। इसमें नामांतरण, उत्तराधिकार, वसीयत व मृत्यु के मामलों में दस्तावेज अपलोड करते ही अपने आप मंजूरी मिल जाएगी। एनओसी जारी करने के लिए पुलिस सत्यापन डाटा से व्यवस्था को जोड़ा जा रहा है।

छोटा होगा लर्नर डीएल का वीडियो
लर्नर डीएल के लिए आवेदकों को यातायात नियमों से संबंधित वीडियो देखना होता है। इसका समय 20 मिनट से पांच मिनट करने और इसे वैकल्पिक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पोर्टल पर लॉगिन सेशन जल्द समाप्त होने और डाउनलोडिंग-अपलोडिंग में आ रहीं दिक्कतें दूर करने के लिए सर्वर को अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए यूपीडेस्को और एनआईसी को निर्देशित किया गया है।

इन सेवाओं के लिए जाना होगा आरटीओ

नए डीएल के टेस्ट के लिए आवेदकों को परीक्षण केंद्र जाना पड़ेगा। बायोमीट्रिक जांच होगी। डीएल में वाहन श्रेणी के विस्तार (दोपहिया वाहनों से चार पहिया) के लिए। वाहनों में तकनीकी बदलाव करवाने के लिए। विंटेज वाहन के पंजीकरण के लिए।

निर्णय के विरोध में आए अफसर-कर्मचारी
आरटीओ की सभी सेवाएं ऑनलाइन करने से अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका लगभग खत्म हो जाएगी। इस कारण निर्णय के विरोध में कई जिलों में प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में मोटरयान अधिनियम की अवहेलना की जा रही है। नई व्यवस्था में खामियां भी हैं।
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नई व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवाल

- वाहनों की खरीद-फरोख्त क्रेता-विक्रेता की स्वतंत्र सहमति पर होती है। सिर्फ ओटीपी से स्वीकृति दिए जाने से सत्यापन कठिन हो जाएगा।
- जनसेवा केंद्रों के जरिये अंगूठे के निशान और ओटीपी व्यवस्था से अपराध बढ़ने की आशंका है।
- एक मोबाइल नंबर परिवार के कई वाहनों से जुड़ा होता है। पारिवारिक झगड़ों की स्थिति में वाहनों के ट्रांसफर में समस्या होगी।
- अभी नए वाहनों का पंजीकरण डीलर अपनी आईडी से करते हैं, जिसके बाद दस्तावेज आरटीओ की साइट पर भेजे जाते हैं। संबंधित पटल सहायक व पंजीयन अधिकारी भौतिक सत्यापन करने के बाद पंजीयन प्रमाणपत्र जारी करते हैं। स्वचालित स्थिति में मंजूरी मिलने पर डीलर की मनमानी हावी हो सकती है।
 
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