सांप्रदायिक हिंसा से जूझ रहे मुजफ्फरनगर में प्रशासन की पाबंदी के बाद भी सात नवंबर को महापंचायत का ऐलान आला अफसरों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
जिले में पहले से ही बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात है। इसमें और इजाफा करने का विचार हो रहा है।
मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।
अधिकारियों की तमाम कोशिशों के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पा रही है। पिछले दिनों तीन लोगों की हत्या के बाद पैदा हुई तनावपूर्ण स्थिति पर काबू पाने के लिए डीजीपी और आईजी कानून-व्यवस्था को खुद मौके पर जाना पड़ा।
अधिकारी कई दिन तक मौके पर ही बने रहे और इस दौरान हिंसा व तनाव से प्रभावित क्षेत्र में बड़ी तादाद में सुरक्षा बल की तैनाती रही।
किसी तरह हालात सामान्य की ओर होने के संकेत आए तो सात नवंबर को महापंचायत का ऐलान हो गया। चूंकि यहां के हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं, लिहाजा ऐसे में महापंचायत जैसे आयोजन से भावनाएं और भड़कने का अंदेशा है।
दूसरी तरफ पुलिस पर एक पक्षीय कार्रवाई का भी आरोप लगाया जा रहा है। आईजी कानून-व्यवस्था आरके विश्वकर्मा का कहना है कि अभी वहां 15 कंपनी सुरक्षा बल तैनात है। जरूरत पड़ने पर और बल की तैनाती की जा सकती है।