ग्रामीण डाकसेवक की आत्महत्या का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। गोलमार्केट(महानगर) स्थित डाकघर में ग्रामीण डाक सेवक अंकित की आत्महत्या से उसके साथियों में रोष है। साथी कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि अफसर उससे डबल ड्यूटी ले रहे थे। दिन के साथ रात में भी ड्यूटी करवा रहे थे। साथ ही बेगारी भी करवाते थे। हालांकि, प्रवर डाक अधीक्षक ऐसे सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज कर रहे हैं।
मामला डाक विभाग से जुड़ा है। गोलमार्केट डाकघर में ग्रामीण डाक सेवक अंकित ने डाकघर में ही आत्महत्या कर ली। इससे उसके साथी कर्मचारियों में नाराजगी है। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ग्रामीण डाक सेवक होने के कारण अफसर उस पर निजी कार्य करने का दबाव भी डालते थे। उससे दिन में ग्रामीण डाक सेवक का काम लिया जाता था, वहीं रात में डाकघर की चौकीदारी करवाई जाती थी। इसके बाद भी आला अफसर इससे अपने पर्सनल काम करवाते थे। आरोप है कि गैस सिलेंडर से लेकर बच्चों को स्कूल ड्रॉप करवाने तक का काम लिया जाता था। कार भी धुलवाई जाती थीं। इतना काम करने के बाद भी अफसर उसे डांटते, फटकारते थे। जिसकी वजह से वह काफी समय से अवसाद में चल रहा था।
दो दिन पहले ही छुट्टी से लौटा था
साथी कर्मचारियों ने बताया कि अंकित इन ताड़नाओं से परेशान होकर छुट्टी लेकर हरियाणा चला गया था। दो दिन पहले ही वह ड्यूटी पर वापस लौटा था। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि निरीक्षण के दौरान शौचालय की सफाई के लिए भी उसे डांटा गया था। उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी गई थी।
आधिकारिक वर्जन
ग्रामीण डाकसेवक अंकित की मौत को लेकर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे फर्जी व बेबुनियाद हैं। उससे ड्यूटी से अधिक कोई काम नहीं लिया जाता था।
-सचिन कुमार चौबे, प्रवर अधीक्षक डाकघर, लखनऊ मंडल