महाकुंभ में तैनात घोड़ों को सेहतमंद रखने के लिए प्रोटीन दी जा रही है। उनकी लगातार सफाई और मालिश भी हो रही है। उनको दिन में तीन बार खाना दिया जाता है। उनको नहलाने के साथ सैंड बाथ भी कराया जा रहा है। मेला क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से परिचय कराने के लिए उनको लगातार भ्रमण कराया जा रहा है। ये भी सिखाया जा रहा है कि भीड़ में वह किसी को चोट नहीं पहुंचाएं। दरअसल, जहां पर पुलिस के वाहन नहीं जा सकते हैं, वहां पर घोड़े अहम भूमिका निभाएंगे। उन पर सवार पुलिसकर्मी की नजर आसपास के क्षेत्र पर रहेगी, जो जमीन पर खड़े पुलिसकर्मी के लिए संभव नहीं होती है। अखाड़ों को लाना, घाट को खाली कराना घुड़सवार पुलिस का काम होगा। आवश्यकता पड़ने पर वह पानी के भीतर जाकर भी भीड़ को नियंत्रित करेंगे।
घोड़ों की हो रही है ट्रेनिंग।
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बता दें कि सेना से चार घोड़े मंगाए गए हैं, जो सबसे महंंगे हैं। इनको पीटीसी सीतापुर में प्रशिक्षण के बाद प्रयागराज लाया गया है। महाकुंभ भेजे गए सभी घोड़ों के नाम मुख्यालय द्वारा रखे गए हैं। उनको नंबर भी आवंटित किया गया है।
तीन डॉक्टर भी किए तैनात
महाकुंभ में ड्यूटी करने वाले घोड़ों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए तीन पशु चिकित्सक भी तैनात किए गए है। इसके अलावा 131 घुड़सवार पुलिस (इंस्पेक्टर ,सब इंस्पेक्टर ,हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल) की तैनाती की गई है। घोड़ों की सेवा के लिये 35 अन्य स्टाफ भी मौजूद रहेगा।
महाकुंभ में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में घुड़सवार पुलिस की भूमिका अहम होगी। भीड़ नियंत्रण और अपार जनसमूह में गश्त के लिए घुड़सवार पुलिस का उपयोग कुशलता और प्रभावशीलता का प्रतीक है। इनके मजबूत प्रशिक्षण और शानदार घोड़ों की सहायता से, कुम्भ मेला पुलिस बल न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि कुंभ के विशाल आयोजन को सुचारु और व्यवस्थित बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।-प्रशांत कुमार, डीजीपी यूपी