केस 1- दो मई 2017- मिर्जापुर जिला जेल में बंद शातिर अपराधी मुन्ना बजरंगी गैंग का रिंकू सिंह शूटर अमन सिंह को फोन पर इलाहाबाद और सिंघरौली में दो लोगों की हत्या करने का हुक्म देता है। एसटीएफ को भनक लगती है और चार दिन की मशक्कत के बाद अमन सिंह गिरफ्तार हो जाता है, जो धनबाद के चर्चित नीरज सिंह हत्याकांड में शामिल था।
केस 2 - 15 जनवरी 2017- इलाहाबाद की नैनी जेल में बंद अपराधी उधम सिंह करनावल-मेरठ में मार्बल व्यवसायी वप्रॉपर्टी डीलर को फोन कर दस-दस लाख की फिरौती मांगता है। फिरौती न देने पर फोन करके दोनों को ठिकाने लगाने के लिए शूटर प्रवीण कुमार पाल को बुलाता है। प्रवीण मेरठ से इलाहाबाद पहुंच जाता है, लेकिन वारदात को अंजाम देने से पहले एसटीएफ उसे दबोच लेती है।
केस-3-विधानसभा चुनाव के दौरान माफिया बृजेश सिंह चंदौली की सैयदराजा सीट से अपने भतीजे सुशील सिंह को जिताने के लिए कई ग्रामप्रधानों और बीडीसी को फोन करता है। भतीजे के नहीं जीतने पर अंजाम बुरा होने की धमकी देता है। शासन में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बिहार में जेल में बंद माफिया शहाबुद्दीन के राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से फोन पर हुई बातचीत ने भले ही सियासी जगत में भूचाल ला दिया हो, लेकिन यूपी में जेलों में बंद अपराधियों का मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना कोई नहीं बात नहीं है।
जेल प्रशासन लाख कोशिशों के बाद भी जेलों में मोबाइल का इस्तेमाल रोकने में नाकाम रहा है। शासन ने जेलों में जैमर लगाने शुरू किए तो अपराधियों ने उसकी भी काट ढूंढ ली। ये जैमर फोर जी नेटवर्क के लिए कारगर साबित नहीं हो रहे हैं।
मुन्ना बजरंगी फोन पर कराता था पंचायत
मुन्ना बजरंगी
- फोटो : demo pic
माफिया डॉन मुख्तार अंसारी हो या उसका विरोधी बृजेश सिंह, मुन्ना बजरंगी हो या सुभाष ठाकुर या दूसरे अपराधी, सलाखों के पीछे से इनकी हुकूमत चलती है। जेलों में इनके लिए मोबाइल की व्यवस्था करना कोई मुश्किल काम नहीं है।
सियासत के गठजोड़ से लेकर सरकारी ठेकों में दखल और दुश्मनों से निपटने के सारे प्लान जेल के अंदर तैयार होते हैं और बाहर उन पर अमल होता है। बड़े माफिया जेल के अंदर से फोन का सबसे अधिक इस्तेमाल रेलवे, सिंचाई और पीडब्ल्यूडी में ठेकों के लिए करते हैं।
साथ ही रंगदारी न देने वाले व्यवसायियों को सबक सिखाने के लिए जेल से ही अपने शूटरों को निर्देश देते हैं। पिछले एक साल में एसटीएफ ने ऐसी घटनाओं को अंजाम तक पहुंचने से पहले रोका है और हर बार जेल महकमे को पत्र लिखा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर बस खानापूर्ति होती रही है। ।
मुन्ना बजरंगी सुल्तानपुर जेल में बंद था। उसने जेल से ही लखनऊ में एक व्यवसायी को फोन कर रंगदारी मांगी। रंगदारी नहीं मिली तो बदमाश व्यापारी की दुकान पर आए और धमकी देकर चले गए।
व्यापारी ने यह बात अपने एक मित्र को बताई जिसकी जान-पहचान मुन्ना बजरंगी से थी। मित्र की मध्यस्थता के बाद लखनऊ में पंचायत हुई और जिसमें फोन पर मुन्ना बजरंगी भी मौजूद था।
मुख्तार को लगी भनक तो बंद करा दिया सीयूजी नंबर
मुख्तार अंसारी
बात पिछले साल की है। एसटीएफ किसी बदमाश की तलाश में थी, तभी माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की कॉल एसटीएफ ने इंटरसेप्ट की। मुख्तार अंसारी विधायक वाले अपने नंबर का धड़ल्ले से जेल में इस्तेमाल कर रहा था। नंबर सरकारी सीयूजी था, इसलिए शासन से अनुमति मांगी गई।
शासन से अनुमति मिलती, इससे पहले मुख्तार को भनक लग गई। इस पूरी प्रक्रिया में शासन में चार माह लग गए और फाइल मुख्यमंत्री की टेबल से होकर जब वापस आई और एसटीएफ को कॉल सर्विलांस पर लेने की अनुमति मिली, तब तक वह नंबर बंद हो चुका था।
पिछले साल दिसंबर में लखनऊ जेल में जैमर लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो मुख्तार अंसारी ने जैमर लगाने वाली कंपनी और उसके टेक्नीशियन को फोन पर अंजाम बुरा होने की धमकी दी।
बाद में जेल विभाग ने स्थानीय पुलिस की मदद से जेल में जैमर लगवाया और जैमर लगाने वाले इंजीनियरों को कुछ दिनों के लिए यूपी से बाहर ही रहने के मौखिक निर्देश भी दे दिए।
अपराधी कर रहे इंटरनेट कॉल का इस्तेमाल
डेमो
- फोटो : demo pic
सूबे में सरकार बदलने पर मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी से लेकर 40 से अधिक छोटे-बड़े अपराधियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया गया। एडीजी जेल जीएल मीणा कहते हैं कि अपराधियों द्वारा मोबाइल के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़ाई की जा रही है।
काफी हद तक अंकुश लगा भी है। सभी जेलों में जैमर लगाए जा रहे हैं। हालांकि ये जैमर फोर जी नेटवर्क को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं, उसकी भी व्यवस्था की जा रही है।
एसटीएफ के एक सूत्र का कहना है कि जेलों में जैमर के बावजूद अपराधी फोर जी नेटवर्क के सहारे हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा का लाभ लेते हुए वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल या वॉट्सएप कॉल का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे ट्रेस करना थोड़ा मुश्किल होता है।