फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना काल में खाली बैठने के बजाय प्लान ‘बी’ के साथ वक्त से कदमताल

विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। ‘नर हो न निराश करो मन को, कुछ काम करो कुछ काम करो’... बहुत पुरानी पंक्तियां हैं, पर जिस मकसद से उस वक्त कवि ने लिखी थीं, वही मकसद, वही भाव और वही हौसले की जरूरत आज भी है। कुछ ऐसे ही हौसले के साथ राजधानी के युवा दिल में यकीन का दीपक जलाए आगे बढ़ रहे हैं। वे आत्मविश्वास से भरे हैं, कहते हैं कि प्लान ए तो यही था कि पढ़ना है, अच्छे नंबरों से पास होना है और अच्छा प्लेसमेंट पाना है। लेकिन कोरोना से पैदा हुए हालात ने हमें प्लान बी का महत्व समझाया और हम लोग अपने-अपने तरीके से इस पर काम कर रहे हैं।
विज्ञापन

स्टार्टअप की दुनिया भाने लगी
मेरा नाम रजनी उपाध्याय है। मैं दिल्ली में जर्नलिज्म की पढ़ाई कर रही थी। होली पर घर आई थी और लॉकडाउन के चलते यहीं रह गई। मेरा प्लान ये था कि पढ़ाई पूरी करके, अच्छा प्लेसमेंट लेकर लखनऊ से बाहर कहीं जाकर जॉब करूंगी। यहां रहने के बाद काफी दिन तक खाली रही। सोचा कि क्या किया जाए तो प्लान बी पर काम शुरू कर दिया। इसी कड़ी में मेरी तलाश पूरी हुई एक स्टार्टअप जर्नलिज्म पर जाकर। मैंने तय किया कि मुझे अपना स्टार्टअप शुरू करना है, पर उससे पहले मैं अनुभव लेना चाहती हूं और एक स्टार्टअप में मैं फिलहाल जॉब कर रही हूं।
एलएलबी के बजाय अब यूपीएससी की तैयारी
अजय उपाध्याय मेरा नाम है, मैं लखनऊ विश्वविद्यालय में बीए पॉलिटिकल अंतिम वर्ष का छात्र हूं। मैं इसके बाद एलएलबी करना चाहता था। अचानक से कोरोना का दबाव आ गया। कई तरह के उतार-चढ़ाव सामने आ रहे हैं। मैंने काफी सोचा फिर तय किया कि अब यूपीएससी की तैयारी करूंगा। इसके अलावा मुझे म्यूजिक का शौक है, मैं पढ़ाई के साथ इसमें भी कॅरियर के विकल्प लेकर आगे बढ़ रहा हूं। अब वो समय है जब हमें विकल्प लेकर चलना ही पड़ेगा।
विज्ञापन

आने वाला कल आईटी का, बस इसी पर फोकस
बीएससी कर रहा हूं, मेरा नाम अस्तित्व दुबे है। लॉकडाउन ने हम लोगों की सोच काफी हद तक बदल दी है। कई दिशाओं में सोचने लगे हैं हम और हमारा फोकस भी सभी तरफ है। कल तक कहा जाता था कि एक पर फोकस करो, लेकिन अब हमें विकल्पों पर भी फोकस करना होगा। इस बदलते वक्त में जिस तरह से लोगों का नुकसान हुआ, उससे यही सीख मिलती है। पहले मैं बायो लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहता था, पर अब मैं आईटी पर फोकस हूं।
पार्ट टाइम नौकरी ही बेहतर विकल्प लगा
ईशा बाजपेई नाम है मेरा और मैं सिटी लॉ कॉलेज में विधि की छात्रा हूं। कोविड-19 के पहले मैं पूरा समय न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी में दे रही थी। महामारी में सब बंद हुआ तो काफी दिक्कतें हम सबके सामने आईं। संस्थान बंद होने से तैयारी भी प्रभावित हो रही थी। इस दौरान मैंने प्लान बी तैयार किया। मुझे लगा कि मैं कहीं जॉब कर लूं, इससे मुझे आर्थिक सहयोग भी मिलेगा और आगे की तैयारी भी ठीक से कर पाऊंगी। फिलहाल मैं नौकरी पर फोकस कर रही हूं। हालात सामान्य होने पर तैयारी फिर से शुरू करूंगी।
आने वाला कल कम्युनिटी सर्विस का
मेरा नाम गौरी शर्मा है और मैंने बनस्थली विश्वविद्यालय से टेक्सटाइल डिजाइन में ग्रेजुएशन किया है और पोस्ट ग्रेजुएशन आगरा से किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नेचुरल डाई में इंटरेस्ट आया तो मैंने इस पर काम किया। रिसर्च भी किया है। दोबारा कोविड आया तो मुझे लगा कि कुछ और भी विकल्पों पर ध्यान देना होगा तो इसमें कम्युनिटी सर्विस एक बेहतर विकल्प लगा। फिलहाल मैं संस्थाओं से जुड़कर अनुभव ले रही हूं।
वकालत नहीं एलएलएम और न्यायिक सेवा की तैयारी
मेरा हिमांशु यादव है और मैं एलएलबी चौथे वर्ष में हूं। मेरा प्लान ए यह था कि इंटर्नशिप करूंगा और उसके बाद वकालत शुरू कर दूंगा। अभी तक की सारी तैयारी इसी हिसाब से चल रही थी, लेकिन कोविड में सब बदल गया, सारे अवसर खत्म हो गए। ऑनलाइन इंटर्नशिप का कोई मतलब नहीं लगा। अब मेरा प्लान बी है कि मैं एलएलएम करूंगा और ज्यूडिशियरी सर्विस की तैयारी करूंगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें