देश का पहला ऐसा विवि बनेगा जो अपने पाठ्यक्रम में खुद का इतिहास पढ़ाएगा
सचिन त्रिपाठी
अपनी स्थापना का सौवां साल मना रहा लखनऊ विश्वविद्यालय एक नई इबारत लिखने को तैयार है। विवि अपने पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य पेपर के रूप में खुद का इतिहास शामिल कर रहा है। लविवि देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बनेगा जो कि अपने पाठ्यक्रम में खुद अपना इतिहास पढ़ाएगा। शताब्दी वर्ष को देखते हुए लविवि ने मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अनिवार्य पेपर में पूरी एक यूनिट लखनऊ विश्वविद्यालय और कैनिंग कॉलेज के इतिहास पर रखी है।
लखनऊ विश्वविद्यालय देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है। इससे पहले देश में सिर्फ कोलकाता विश्वविद्यालय, मद्रास विवि, मुंबई विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विवि, उस्मानिया विवि, बनारस हिन्दू विवि, पटना विवि, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और मैसूर विवि की स्थापना हुई थी। इस साल लविवि अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। लविवि की स्थापना वाले अधिनियम पर 25 नवम्बर 1920 को भारत के गवर्नर जनरल ने हस्ताक्षर किए थे।
जुलाई 1921 से यहां पढ़ाई शुरू हुई थी। विवि की स्थापना से पहले कैनिंग कॉलेज के नाम से इसका संचालन होता था। कैनिंग कॉलेज की स्थापना 1 मई 1864 को हुई थी। नवाबी दौर में अवध में उच्च शिक्षा की पढ़ाई का एकमात्र केंद्र लविवि ही था। इसकी स्थापना का इतिहास भी बेहद दिलचस्प है। किसी व्यक्ति या सरकार के बजाय दान, चंदे और आपसी सहयोग से इसकी नींव पड़ी थी। इसको देखते हुए लविवि प्रशासन ने विद्यार्थियों को अपना इतिहास बताने का रास्ता निकाला है। लविवि प्रशासन के अनुसार सभी विद्यार्थियों को अपना इतिहास पता होना चाहिए। इससे वे अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं।
तीसरे सेमेस्टर में होगा पेपर
लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास वाला यह पेपर मध्यकालीन भारतीय इतिहास विभाग में परास्नातक स्तर पर शामिल किया गया है। अवध में नवाबी दौर के नाम वाले इस पेपर की पांचवीं यूनिट कैनिंग कॉलेज और लविवि की स्थापना पर आधारित है। पांचवीं यूनिट में एजूकेशन इन नवाबी एरा, कैनिंग कॉलेज का उदय, लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रमुख विभाग और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को शामिल किया गया है। इस पेपर में इसके साथ ही अवध के विभिन्न नवाब, यहां के आर्किटेक्चर, म्यूजिक, डांस, क्राफ्ट आदि को भी शामिल किया गया है। यह पेपर विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ स्टडीज, फैकल्टी बोर्ड, एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद से भी पास हो चुका है। इस साल एमए इतिहास में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी यह पेपर पढ़ेंगे। इस लिहाज से अगले साल यानी तीसरे सेमेस्टर में वे इसकी परीक्षा देंगे।