लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के निष्कासन को लेकर गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। दूसरे दिन बुधवार को भी छात्रों ने बेमियादी धरना जारी रखा। उन्हें राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडलों ने धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की। छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को धरना दे रहे छात्रों से मिलने लविवि पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में विनीत कुशवाहा, त्रिशूल धारी सिंह, करुणेश द्विवेदी और अनिल यादव मास्टर शामिल रहे। उन्होंने आश्वस्त किया कि समाजवादी पार्टी उनके लोकतांत्रिक संघर्ष में साथ खड़ी है। प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि कुलपति व्यस्त हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस उपाध्यक्ष दिनेश सिंह और प्रदेश प्रवक्ता सुधांशु ने धरना स्थल पर छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से बात रखने वाले छात्रों के साथ दमनात्मक व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक है। वे न्याय मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
छात्रों की मुख्य मांगें
निष्कासित छात्र प्रिंस प्रकाश, प्रेम यादव और हर्षित शुक्ला का कहना है कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं है। वे शिक्षा के अधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और विश्वविद्यालयों में संवाद की संस्कृति को बचाना चाहते हैं। छात्रों ने विवि प्रशासन से निष्कासन तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने दमनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा और फीस वृद्धि संबंधी प्रश्नों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।