क्रिस्प के माध्यम से एनआईआरएफ रैंकिंग के लिए चयनित लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध पांच जिलों लखनऊ, रायबरेली, लखीमपुरखीरी, सीतापुर और हरदोई के 16 कॉलेजों में शासन के निर्देशों पर कौशल आधारित कोर्स इसी सत्र से शुरू होने हैं। इनमें से दस कॉलेज राजधानी लखनऊ में हैं बाकी अन्य जिलों शिक्षण संस्थान हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय ने शासन के दबाव में सत्र समापन के समय पर इन कॉलेजों में कोर्सो के संचालन के लिए कार्य-परिषद और विद्यापरिषद के जरिए अनुमति तो प्रदान कर दी है। लेकिन जिन कॉलेजों में ये कोर्स शुरू किए जाने हैं उनमें से आधे से अधिक कॉलेजों अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। कॉलेजों को डर सता रहा है कि सत्र समापन की कगार पर है और ऐसे में अगर कोर्सो की सहयुक्ता ले लेते हैं तो कोर्स में प्रवेश के लिए छात्र कहां से लाएंगे। ऊपर से सहयुक्तता शुल्क देने की स्थिति में ऐडेड कॉलेज पहले अक्षमता जाहिर कर चुके हैं।
कौशल आधारित कोर्स शुरू करने के लिए कॉलेजों द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय से सहयुक्तता प्राप्त करने के लिए 16 में 6 कॉलेजों ने ही आवेदन किया है। इसमें दो राजकीय कॉलेज, दो निजी और दो ऐडेड अल्पसंख्यक कॉलेज हैं। बचे हुए दस कॉलेजों ने आर्थिक संकट और सत्र समापन का हवाला देते हुए आवेदन करने से मना कर दिया है। उनका कहना है वह आगामी सत्र में इसके लिए सोचेंगे। सहयुक्तता के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 सितंबर निर्धारित थी। वहीं सहयुक्ता प्रदान करने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर निर्धारित है। सहयुक्तता मिलने के बाद ही आवेदन करने वाले कॉलेज कोर्स से संबंधित प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे।
इन कॉलेजों ने किया आवेदन
कौशल आधारित कोर्सो के लिए सहयुक्तता प्राप्त करने के लिए शिया पीजी कॉलेज, करामत हुसैन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, नेता जी सुभाष चंद्र बोस राजकीय कन्या महाविद्यालय, हीरालाल यादव बालिका डिग्री कॉलेज, गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर स्टडीज, दीन दयाल उपाध्याय राजकीय डिग्री कॉलेज सीतापुर शामिल हैं।
ये कोर्स शुरू होने हैं
बीबीए रिटेल, बीबीए लॉजिस्टिक, बीएससी टूरिज्म एंड हॉस्पिटलिटी, बीबीए हेल्थ केयर
हमने हालहीं में कई कोर्सो की सहयुक्तता प्राप्त की है। अब कॉलेज सहयुक्तता लेने के लिए आर्थिक तौर सक्षम नहीं है। अगले वर्ष इसपर विचार करेंगे। सरकार से अनुरोध है इन कोर्सो के लिए सहयुक्तता शुल्क माफ हो। दूसरा संकट इनमें छात्रों के प्रवेश का है सत्र समापन की ओर है ऐसे में छात्र दाखिले के लिए आगे शायद ही आए।
- चंद्रमोहन उपाध्याय प्राचार्य कालीचरण पीजी कॉलेज
हमने बीबीए रिटेल के लिए अनुरोध किया था लेकिन हमें बीबीए लॉजिस्टिक दिया गया। दूसरा सहयुक्तता शुल्क काफी अधिक जिसे प्रबंधन देने को राजी नहीं है। ऐसे में अगले वर्ष ही इस विचार हो पाएगा, इसमें भी सबसे बड़ा संकट छात्रों के प्रवेश का है। 0-
- प्रो. मंजुला उपाध्याय प्राचार्य नवयुग कन्या महाविद्यालय