लखनऊ। लविवि में होने वाले भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 109वें वार्षिक अधिवेशन में किसान और आदिवासियों के विशेष सम्मेलन भी होंगे। समाज और विज्ञान के सीधे संबंध पर आधारित विशेष सत्र का आयोजन भी किया जाएगा। लविवि में अगले साल तीन से सात जनवरी के बीच होने वाले इस आयोजन की तैयारी परखने के लिए भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ की टीम ने अपने दौरे के दूसरे दिन इस बारे में योजना बनाई।
टीम के सदस्य और भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अशोक सक्सेना ने बताया कि विज्ञान कांग्रेस का मकसद विज्ञान को जन-जन से जोड़ना है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। विज्ञान का लाभ किसानों को भी मिलना चाहिए। इसलिए विज्ञान कांग्रेस में इसका विशेष सत्र रखा जा रहा है। इसी तरह जनजातीय विकास भी एक बड़ा मुद्दा है। इसलिए इन दोनों पर आधारित विशेष सम्मेलन होंगे। बीच के कई साल इन पर आधारित सत्र नहीं हो रहे थे। साथ ही समाज और विज्ञान के आपसी संबंधी पर आधारित विशेष सत्र के अलावा महिला, बाल विज्ञान और संचार मीट भी इस बार के आयोजन के प्रमुख केंद्र होंगे। लविवि में शनिवार को भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ की टीम ने ऑडिटोरियम, लेक्चर हाल सहित विवि की सभी सुविधाओं का जायजा लिया। कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियों की रूपरेखा और तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए डीन एकेडमिक्स प्रो. पूनम टंडन व अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे।
शिक्षक और विद्यार्थियों की टीमें बनेंगी
लविवि कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि कार्यक्रम के लिए कई टीमों का गठन किया जा रहा है। इन टीमों में शिक्षकों के साथ ही स्टूडेंट वालंटियर भी शामिल होंगे। विज्ञान कांग्रेस में विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इनमें कृषि और वानिकी विज्ञान, पशु, पशु चिकित्सा और मत्स्य विज्ञान, मानव विज्ञान और व्यवहार विज्ञान (पुरातत्व, मनोविज्ञान, शिक्षा और सैन्य विज्ञान सहित), रासायनिक विज्ञान, पृथ्वी प्रणाली विज्ञान, इंजीनियरिंग विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, सूचना और संचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी (कंप्यूटर सहित) विज्ञान), गणितीय विज्ञान (सांख्यिकी सहित), चिकित्सा विज्ञान (फिजियोलॉजी सहित), न्यू बायोलॉजी (जैव रसायन, बायोफिजिक्स और आणविक जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी, भौतिक विज्ञान, पादप विज्ञान सहित) के विशेषज्ञ शामिल हैं।