प्रो. मोहिनी मांगलिक।
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कैलाश छात्रावास में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने छात्राओं के साथ चौपाल लगाई थी। इस कार्यक्रम में मौजूद रहीं लविवि के अंग्रेजी विभाग की पूर्व शिक्षक प्रो. मोहिनी मांगलिक बताती हैं कि प्रधानमंत्री बिना किसी तामझाम के इस तरह छात्राओं से बात कर सकती हैं, उन्होंने सोचा ही नहीं था।
यह दिसंबर 1974 की बात है। विवि में छात्रों के साथ उस समय जय प्रकाश नारायण काफी सक्रिय थे। छात्रों के बीच इंदिरा गांधी का काफी विरोध था। इस बीच इंदिरा जी कैलाश छात्रावास पहुंचीं। भाषण देने बजाय करीब डेढ़ घंटे बातचीत की। एक छात्रा ने उनसे सवाल किया कि आखिर छात्रावास में इतनी सख्ती क्यों होती है। इस पर इंदिरा जी ने कहा यहां आकर मुझे तो वे ऐसा बिल्कुल नहीं लगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय का कैलाश छात्रावास।
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लविवि में शुरुआती छात्रावासों के नाम अंग्रेजों के नाम पर रखे गए थे। सबसे पहले हीवेट, मेस्टन और बटलर छात्रावास थे। इसके अलावा महमूदाबाद और हबीबुल्लाह छात्रावास भी स्थापित किए गए। आजादी के बाद अंग्रेजों के नाम के बजाय भारतीयों के नाम पर छात्रावासों का नामकरण करने के लिए एक समिति भी बनाई।
इसके बाद हीवेट का नाम सुभाष, मेस्टन का तिलक और बटलर का नाम बदलकर गोल्डेन जुबिली छात्रावास रखा गया।