लखनऊ। आज जज हूं, पर लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते समय छात्र था। एक समय ऐसा था जब बगैर आवंटन के छात्रावास में पकड़े जाने पर मुझे रात तीन बजे शहर के बाहर छोड़ा गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एआर मसूदी के मुंह से यह वाकया सुनकर वहां मौजूद हर शख्स हंसने लगा। जस्टिस मसूदी के साथ ही छह अन्य विभूतियों को लविवि के स्थापना दिवस समारोह में सम्मानित किया गया। सातवें चयनित पूर्व छात्र असम के डीजीपी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित नहीं हो सके।
लविवि के 103वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय उच्च शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी मौजूद रहीं। उन्होंने इस मौके पर विवि की कॉफी टेबल बुक और कैलेंडर का विमोचन किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के सभी संकायों के संकाय अध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक व पूर्व छात्र-छात्राएं एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य मौजूद रहे।
परिसर में होगी आयुर्वेद और यूनानी विधा की पढ़ाई
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय ने कृषि की पढ़ाई के लिए अपने कदम पहले ही बढ़ा दिए हैं। इसके साथ भविष्य में हमारी योजना है कि विवि पूर्ण मेडिकल फैकल्टी विकसित करें। इसमें आयुर्वेद और यूनानी विधा की पढ़ाई होगी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी शाम
स्थापना दिवस समारोह में शाम-ए-अवध कार्यक्रम में प्रो. मधुरिमा लाल ने बेगम अख्तर की गजल पेश की। इसके बाद विद्यार्थियों ने कथक की दूसरी विधा जश्न-ए-महफ़िल पर प्रस्तुति दी। वहीं छात्र-छात्राओं ने सूफी नृत्य भी किया। संचालन डॉ. किरणलता डंगवाल एवं डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव ने किया।
सम्मानित होने वाले पूर्व छात्रों से बातचीत
फिजिक्स डिपार्टमेंट की छत से इसरो तक की उड़ान
मिशन मंगल का सफल होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा और भावुक क्षण था। मेरा बचपन से ही साइंस की ओर रुझान था जिसे लविवि ने परवान चढ़ाया। स्पेस साइंस में कॅरिअर बनाने का मौका मिला और इसरो ज्वाइन किया। विवि के दिनों में टैगोर लाइब्रेरी के पार्क में बैठना और फिजिक्स डिपार्टमेंट की छत पर घूमना सबसे यादगार लम्हें थे। जीवन में जहां भी उसमें मेरे विवि का योगदान है।
- रितु करिधाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक इसरो
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अब हाइटेक हो गए हैं हॉस्टल
मैंने वर्ष 1983 से 1989 तक लविवि में एमए व एलएलबी की पढ़ाई की। उस समय आचार्य नरेंद्र देव हॉस्टल में रहते थे जो तब आज जितना हाइटेक नहीं था। आज जब दोबारा हॉस्टल जाने का मौका मिला तो बड़ा बदलाव दिखा। अब पहले से अधिक विदेशी विद्यार्थी भी यहां रह रहे हैं। मेरी सफलता में लविवि का बड़ा योगदान है जिसे कभी नहीं भुला सकता। हर संभव मदद मैं विवि के लिए करूंगा। छात्रसंघ चुनाव के दिन याद आते हैं, उस समय चुनाव सांसद के चुनाव सरीखे होते थे।
- रमेश लेखक, पूर्व सांसद नेपाल
किस्मत में पढ़ाना नहीं पत्रकारिता लिखी थी
मैं विवि पढ़ाई करने इसलिए आया था कि भविष्य में प्रोफेसर बनूं। इस सपने के बाद मेरा दूसरा प्रेम थियेटर था। लेकिन किस्मत में कुछ और था। बीए में इतिहास से पढ़ाई की। फिर पत्रकारिता डिग्री ली, उसके बाद फिर यही प्रोफेशन बन गया। लखनऊ विवि का मेरा जीवन बदलने में बड़ा रोल है। यहीं से मुझे मेरी जीवन साथी भी मिली।
प्रतीक त्रिवेदी वरिष्ठ पत्रकार
लविवि में देर से होते हैं एलएलबी के दाखिले
मेरा दाखिला कश्मीर विवि में नहीं हो सका था। अलीगढ़ विवि में दाखिला हुआ तो वहां देर से पहुंचा था। ऐसे में वहीं पर किसी ने बताया कि लविवि चले जाओ। वहां पर एलएलबी की पढ़ाई काफी देर से शुरू होती है। इसके बाद लविवि आकर दाखिला ले लिया। इसी तरह तीन साल दोस्तों के सहारे हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। मुझे मेरे मित्र और विवि के शिक्षक रहे नीरज जैन याद आते हैं जो एक कप चाय पिलाने के लिए चारबाग तक की दूरी पैदल तय करा देते थे। विश्वविद्यालयों में अनुशासित छात्रसंघ बेहद जरूरी है। इससे छात्रों को लोकतंत्र और प्रजातंत्र की अहमियत पता चलती है।
- जस्टिस एआर मसूदी, इलाहाबाद हाइकोर्ट
बहुत ताकतवर है इंटरनेट, पर छात्र न मरनें दें क्रिएटिविटी
लविवि से निकलकर विदेश का सफर तय करने में इस संस्थान का बहुत बड़ा योगदान है। उस समय इंटरनेट का समय नहीं था। इसलिए क्रिएविटी ज्यादा थी। आज के समय में शिक्षक और अभिभावक दोनों के सामने बच्चे की क्रिएटिविटी बचाने की समस्या है। मेरा मानना है सभी को समझना चाहिए कि इंटरनेट ताकतवर है, पर इसके चलते हम क्रिएविटी को समाप्त नहीं कर सकते हैं। विद्यार्थियों को सफलता के लिए फोकस, कड़ी मेहनत, पैसन, एथिक्सि और आउट ऑफ बॉक्स पर सोचना चाहिए।
- डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, वैज्ञानिक