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लविवि : 74 फीसदी पदक बेटियों के नाम

Fri, 24 Nov 2023 02:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 74 फीसदी पदकों पर इस वर्ष भी बेटियों ने ही कब्जा जमाया है। समारोह में दिए जाने वाले कुल 192 पदकों में 78 पदक लड़कियों को और 28 लड़कों को मिलेंगे। प्रस्तावित पदकों की सूची परीक्षा विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को जारी कर दी गई।
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लविवि का 66वां दीक्षांत समारोह छह दिसंबर को प्रस्तावित है। समारोह में सबसे अधिक एमए एआईएच की अपराजिता सिंह को नौ स्वर्ण पदक और एमए गणित के छात्र श्रेयांश शुक्ला को आठ स्वर्ण व एक रजत पदक के लिए चयनित किया गया है। वहीं एलएलबी तीन वर्ष की छात्रा इफत खान को आठ स्वर्ण पदक, एमएससी फिजिक्स के छात्र अमन स्वर्णकार को छह स्वर्ण पदक, एमए पॉलीटिकल साइंस की आयुषी मेहरा और एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की अनुष्का सिंह को पांच-पांच स्वर्ण पदक मिलेंगे। इसके अलावा अन्य विद्यार्थियों का भी इस फेहरिस्त में नाम शामिल है।

दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। समारोह विवि के कला प्रांगण में होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि को लेकर खोज चल रही है। अभी तक मुख्य अतिथि के लिए इसरो चीफ एस. सोमनाथ का नाम प्रस्तावित है।
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पदक के लिए चयनितों से बातचीत

सिविल सेवा में जाने का है सपना

मैंने कैलाश हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की है। सर्वाधिक नौ स्वर्ण पदकों के लिए चयन होना मेरे लिए गौरव की बात है। भविष्य में सिविल सेवा में कॅरिअर बनाने का सपना है। पिता निशांत सिंह प्रयागराज में निजी कंपनी के एचआर विभाग में हैं, मां ममता सिंह गृहिणी हैं। मैंने बीए और एमए दोनों लविवि से किया है। मेरी सफलता में शिक्षकों और माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान है।

- अपराजिता सिंह, एमए एआईएच, नौ गोल्ड मेडल

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प्रोफेसर बन समाज को शिक्षा से जोड़ना है
लविवि से बीएससी 79.9 प्रतिशत और एमएससी 88 प्रतिशत अंकों से पास की है। आठ स्वर्ण व एक रजत पदक के लिए चयन होना सौभाग्य है। अब नेट जेआरएफ पास कर असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर समाज को शिक्षा से जोड़ना चाहता हूं। पापा मनोज शुक्ला सेना में हैं। मां सविता शुक्ला गृहिणी हैं।

- श्रेयांश शुक्ला, एमएससी गणित, आठ गोल्ड व एक सिल्वर मेडल



बड़ा वकील बनना है मुझे
मैंने शिया पीजी कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की है। आठ स्वर्ण पदकों के लिए चयन होना पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है। मेरा सपना है शहर का बड़ा वकील बनने की है। पिता मसर्रत अली प्राइवेट जॉब में हैं, मां निसार खान हाउसवाइफ हैं।

- इफत खान, एलएलबी, आठ स्वर्ण पदक



नेट जेआरएफ उत्तीर्ण करना लक्ष्य

मैं नेट की तैयारी कर रहा हूं। कोशिश है कि जेआरएफ हो जिससे शोध में आसानी हो। भविष्य में असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहता हूं। मैंने नेशनल पीजी कॉलेज से बीएससी और केकेसी से पीजी किया है। पिता राजकिशोर स्वर्णकार की ज्वैलरी शॉप है। मां अन्नू स्वर्णकार गृहिणी हैं।

- अमन स्वर्णकार, एमएससी फिजिक्स, छह स्वर्ण पदक

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सरकारी सेवा में बनाना है कॅरिअर

मैंने लविवि से एमए पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की है। मुझे कैलाश छात्रावास आवंटित था। मैं मूलरूप से चंदौसी की रहने वाली हूं। सरकारी सेवा में कॅरिअर बनाना है, इसके लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हूं। पिता राकेश मेहरा सरकारी सेवा में हैं। मां आशु मेहरा गृहिणी हैं।
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- आयुषी मेहरा, एमए पॉलिटिकल साइंस, पांच स्वर्ण पदक

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आईएएस बनने का है लक्ष्य

मुझे सिविल सेवा में चयनित होकर आईएएस अधिकारी बनना है। पांच स्वर्ण पदक के लिए चयन होने पर खुश हूं। इसमें माता-पिता का बहुत योगदान है।

अनुष्का सिंह, एमपीए, पांच स्वर्ण पदक
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