आक्रोशित लोगों का कहना था कि डीएम, पुलिस कमिश्नर को बुलाओ फिर बात होगी। शहर में दिनदहाड़े तीन लोगों की हत्या हो जाती है और अधिकारी पीड़ित परिवार से मिलने भी नहीं आते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोपहर करीब एक बजे डीएम विशाख जी. और पुलिस आयुक्त तरुन गाबा मौके पर पहुंचे। दोनों सीधे शिवाजी के घर में चले गए। काफी देर तक अधिकारियों और पीड़ित परिवार में बातचीत होती रही पर कोई नतीजा नहीं निकला।
आरएसएस के पदाधिकारियों ने भी जताई नाराजगी
शिवाजी तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में आरएसएस के पदाधिकारी भी पहुंचे थे। पीड़ित परिवार की हालत देखकर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी नाराज हो गए और डीजीपी व प्रमुख सचिव गृह को बुलाने की बात कही। उनकी फोन पर उच्चाधिकारियों से बहस भी हुई। संघ ने पीड़ित परिवार की मांगें मानने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा। इस दौरान पुलिस अधिकारियों को लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा।
डिप्टी सीएम ने शवों को दिया कंधा
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हंगामे के बीच दोपहर 2:45 बजे महापौर सुषमा खर्कवाल मौके पर पहुंचीं। उनके आते ही लोगों ने फिर से नारेबाजी शुरू कर दी। करीब 3:15 बजे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और भाजपा नेता नीरज सिंह परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान भी लोगों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। डिप्टी सीएम ने आरोपियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होगी। डिप्टी सीएम के आश्वासन पर परिजन अंतिम संस्कार के लिए माने। ब्रजेश पाठक और नीरज सिंह ने शवों को कंधा दिया और गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए।
जिस परिवार में वर्षों बाद मांगलिक कार्यक्रम होना था आज वहां मातम पसरा हुआ है। सुयष की शादी के कार्ड छपने गए थे। मेहमानों की सूची तैयार की जा रही थी लेकिन किसी को पता नहीं था कि शादी से पहले तीन-तीन लोगों की तेरहवीं की तैयारी करनी पड़ेगी। ब्राह्मणी टोला में हर तरफ इसी की चर्चा थी। एक साथ तीन अर्थियां उठीं तो शिवाजी तिवारी की पत्नी ऊषा की चीख निकल पड़ी। कभी वह बेटे के शव से चिपक कर जिगर के टुकड़े को निहार रही थीं तो कभी सुहाग को अंतिम विदाई दे रही थीं। ऊषा की हालत देख वहां मौजूद सैंकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं।
सुयष रविवार को परिवार के साथ ननिहाल में दिवाई की रस्म कराने गए थे। शादी का ज्यादातर सामान खरीदा जा चुका था। माता-पिता एकलौते बेटे की शादी धूमधाम से करने वाले थे। बेटे के लिए कमरे का रिनोवेशन एवं घर की मरम्मत के साथ पुताई का काम भी चल रहा था। सुयश कुछ दिन बाद शादी के लिए अपने कपड़े खरीदने वाले थे। इसके लिए उन्होंने दोस्तों से बात भी की थी। मंगलवार को सुयश के दोस्त भी वहां मौजूद थे लेकिन सबकी आंखों में आंसू थे। कॉलोनी की महिलाएं ऊषा, रुचि और सुमेधा को सांत्वना दे रही थीं। नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में सोमवार रात भर मोहल्ले के लोग जागते रहे। हर घर में इसी घटना को लेकर चर्चा होती रही।