दुबग्गा के लालजी टंडन वार्ड क्षेत्र में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हयात नगर न्यू कॉलोनी से बुधवार को 40 से अधिक परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं, टाड़खेड़ा, सैथा, उमरावखेड़ा, गुलमीखेड़ा, सुखलालखेड़ा और धनसिंहखेड़ा समेत दर्जन भर गांव के करीब तीन हजार घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इससे ग्रामीणों को पलायन और चोरी का भय सताने लगा है।
जोनल अधिकारी अमरजीत यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही नाव से परिवारों को गृहस्थी समेत सुरक्षित निकालकर रैन बसेरों में पहुंचाया जा रहा है। उमरावखेड़ा में पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। सीएचसी अधीक्षक केडी मिश्रा ने बताया कि बुधवार को 134 किट विभिन्न दवाएं वितरित की गईं। तीन दिनों में 807 किट बांटी जा चुकी है। डॉक्टरों की टीम अब तक 257 घरों का सर्वे कर चुकी है और मरीजों की जांच कर दवाएं दी जा रही हैं। दो गर्भवती महिलाओं को सीएचसी भेजा गया, जिसमें सैथा की महिला का सामान्य प्रसव हुआ। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। विवेक यादव, लवकुश, दिनेश और सुरेश समेत ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रात की गश्त बढ़ाने की मांग की है।
गोमती का जलस्तर बढ़ने से घैला गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आया गया है। करीब छह हजार की आबादी वाले गांव के चारों ओर पानी भर चुका। आईआईएम रोड से गांव को जोड़ने वाला इकलौता रास्ता तीन से चार फीट पानी में डूबने से ग्रामीणों की आवाजाही ठप हो गई है। घरों में पानी घुसने और मवेशियों के लिए चारे व साफ पानी का संकट खड़ा होने के बाद पशुपालक मवेशी लेकर आईआईएम रोड के किनारे पहुंच गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित मामा कॉलोनी, पवन विहार और दाऊदनगर समेत अन्य इलाकों पर प्रशासन का ज्यादा ध्यान है, जबकि घैला गांव को भुला दिया गया है। गांव में अब तक राहत सामग्री, चारा या साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।