ईडी ने रोहतास ग्रुप के खिलाफ निवेशकों द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गईं 83 एफआईआर के आधार पर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी, जिसमें पता चला कि रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड ने अपनी टाउनशिप योजनाएं 'सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट', 'रायबरेली रोड प्रोजेक्ट' और 'रोहतास प्लमेरिया' में ग्राहकों से प्लॉट और फ्लैट बुक कराने के लिए करोड़ों रुपये लिए थे। बुकिंग की तारीख से 30 महीने बाद निवेशक या तो संपत्ति पर कब्जा अथवा बुकिंग राशि की एकमुश्त 150 फीसद रकम ले सकते थे। हालांकि कंपनी ने अपने प्रोजेक्ट विकसित नहीं किए और ग्राहकों की जमापूंजी वापस नहीं लौटाई।
दूसरी जगह डायवर्ट की रकम
जांच में सामने आया कि रोहतास ग्रुप के प्रमोटरों ने खरीदारों से इकट्ठा किए गए पैसे को अपनी एसोसिएट कंपनियों और बेनामीदारों के नाम पर ज़मीन खरीदने में खपा दिया। इन संपत्तियों को छिपाने के लिए सहयोगी कंपनी वर्धन टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया।
इसी तरह बेनामी संपत्तियों को भी अध्याय रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर एलएलपी को ट्रांसफर कर दिया। दीपक रस्तोगी ने इन बेनामीदारों से कुछ भूखंड हासिल कर उन्हें बैंकों के पास गिरवी रख दिया, ताकि आगे साफ-सुथरा बैंकिंग फंड मिल सके। ईडी इस मामले की आगे जांच कर रहा है।