ग्यारहवीं में पढ़ने वाले भाई-बहन अर्णव रतन और अर्शिया रतन की मदद से नौ साल की दीपिका अपने परिवारीजनों तक पहुंच गई। दीपिका चार दिसंबर को झांसी से भटक कर चारबाग स्टेशन चली आई थी।
जीआरपी ने बच्ची को चाइल्ड लाइन के जरिये पराग नारायण रोड स्थित राजकीय बाल गृह (शिशु) भिजवा दिया था। दो दिन तक बच्ची के घरवालों के बारे में जानने की कोशिश तक नहीं की गई।
रविवार को स्टडी हॉल में पढ़ने वाले भाई-बहन अर्णव व अर्शिया काउंसलिंग के मकसद से बाल गृह पहुंचे, जहां बातचीत में दीपिका उनसे काफी घुलमिल गई। उसने बताया कि मां की पिटाई से नाराज होकर वह घर से चली आई थी और ट्रेन में बैठकर यहां आ गई।
यह भी बताया कि वह चौथी की छात्रा है। अर्णव व अर्शिया ने घर का पता या पिता का फोन नंबर पूछा, लेकिन वह नहीं बता पाई। हालांकि, अपने भाई राजा का फोन नंबर लिखकर दे दिया।