इनके अलावा डीजीपी मुख्यालय में तैनात विजय सिंह मीना, सुनील कुमार गुप्ता और नीरा रावत को छोड़कर सभी का नाम पदक सूची में शामिल कर लिया गया। यहां तक कि प्रतिनियुक्ति से लौटकर डीजीपी ऑफिस में अपनी तैनाती का इंतजार कर रहे डीके ठाकुर को भी इस पदक से नवाज दिया गया। अमूमन डीजीपी का प्रशंसा चिह्न किसे दिया जाएगा, इसमें शासन या मुख्यमंत्री कार्यालय की कोई भूमिका नहीं होती थी, लेकिन इस बार जैसे ही सूची बाहर आई, इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई।
मुख्यमंत्री ने डीजीपी को बुलाकर स्थिति साफ करने को कहा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। जिन लोगों को अवॉर्ड दिए जाने थे, उनकी लिस्ट जिलों में और जोन, रेंज व विभागीय मुखिया को भेजी जा चुकी थी। हालांकि मुख्यमंत्री की नाराजगी को देखते हुए अंतिम समय में कुछ नाम होल्ड कर लिए गए और संबंधित अधिकारी को उन्हें अवॉर्ड न देने की हिदायत दी गई। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि अगर ये अफसर काबिल नहीं थे, तो इनके नाम अवॉर्ड की सूची में क्यों जोड़े गए?
सूची में कुछ ऐसे नाम भी हैं जिनको किसी न किसी सिफारिश के आधार पर यह पुरस्कार दिया गया था। इनमें मेरठ में ट्रेनी आईपीएस अंकित मित्तल और सुरक्षा मुख्यालय में तैनात गौरव सिंह शामिल हैं। अंकित एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रिश्तेदार हैं जबकि गौरव सिंह को रायबरेली में पांच लोगों की हत्या के बाद वहां से हटाया गया था।
सूत्रों के अनुसार, लिस्ट फाइनल होकर जब बाहर आई तो उसमें कई नाम ऐसे थे जो चौंकाने वाले थे। इन नामों पर मुख्यमंत्री के सामने आपत्ति दर्ज कराई गई। इनमें डीजीपी के डीए प्रद्युमन सिंह का नाम भी था जिनका काम डीजीपी मुख्यालय पर आने वालों को डीजीपी से मिलवाना और ऑफिस का फोन अटेंड करना भर होता है।
सरकार आने के बाद सीतापुर पीटीसी भेजे गए अपर पुलिस अधीक्षक हबीबुल हसन, पीएसी में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक डीके धवन का भी नाम इस लिस्ट में शामिल था, जिस पर आपत्ति दर्ज कराई गई।
वहीं जिलों में अच्छी परफॉर्मेंस न देने वाले कुछ अफसरों के नाम सूची में शामिल होने पर भी मुख्यमंत्री कार्यालय को एतराज था। डीजीपी मुख्यालय में तैनात कुछ अधिकारियों का कहना है कि जिन पुलिस कर्मियों को डीजी प्रशंसा चिह्न दिया गया है, उससे कहीं बेहतर काम करने वाले अफसर व पुलिस कर्मी जिलों में मौजूद हैं। हालांकि इस मुद्दे पर कोई भी अधिकारी आधिकारिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है।
लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार, मथुरा के एसएसपी स्वप्निल ममगैन।
इनके नाम अंतिम समय में जोड़े गए
एसपी खीरी एस चिनप्पा, डीआईजी मुरादाबाद डॉ. प्रीतिंदर और बुलंदशहर के एसपी मुनिराज जी।
अजय साहनी का नाम गैलेंट्री के लिए प्रस्तावित
आजमगढ़ के एसएसपी अजय कुमार साहनी के नाम का प्रस्ताव राष्ट्रपति के वीरता पदक के लिए भेजा गया है। चूंकि साल में एक अधिकारी या पुलिस कर्मी एक ही पदक के लिए चुना जाता है, इसलिए इनका नाम किसी अन्य सूची में नहीं रखा गया। इसी तरह शामली के एसपी अजय पाल शर्मा को पिछले स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया था, इसलिए उनका नाम भी सूची में नहीं रखा गया।
डकैती की घटनाओं ने दीपक की मेहनत पर फेरा पानी
लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार ने मुहर्रम के दौरान न सिर्फ शांतिपूर्ण जुलूस निकलवाए, बल्कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन शांतिपूर्ण कराते हुए जुलूस का मार्ग भी बदलवाया। इसे देखते हुए प्रशंसा चिह्न के लिए उनका चयन किया गया था, लेकिन हाल ही राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों में एक के बाद एक डकैती की घटनाओं ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।