लखनऊ में बेसिक शिक्षा विभाग की जटिल व्यवस्था और प्रशासन की लापरवाही से राजधानी के परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 20 हजार बच्चों को अभी भी डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) का इंतजार है। छह महीने से इंतजार में बैठे अभिभावक स्कूली बच्चों के लिए यूनिफार्म और गर्म कपड़े तक नही खरीद पा रहे हैं। विभाग की लचर व्यवस्था से बच्चे पुराने कपड़े में ही स्कूल जाने को मजबूर हैं।
शिक्षा निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी के 1600 से अधिक परिषदीय विद्यालयों में 1.56 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें डीबीटी का लाभ न मिलने वाले 20,000 बच्चों में से करीब 5,000 अभिभावकों के बैंक खाता आधार से नहीं जुड़ा है, इसकी वजह से उन्हें डीबीटी का लाभ नहीं मिला। इतना ही नहीं, जिला बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से करीब 200 बच्चों की डीबीटी की धनराशि रोकी गई है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि राजधानी के परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को डीबीटी की धनराशि भेजी जा चुकी है। कुछ अभिभावकों के बैंक खाता से आधार कार्ड नंबर न जुड़ने की वजह डीबीटी धनराशि न मिलने की जानकारी मिली है। आधार कार्ड व अन्य का सत्यापन कर जल्द ही बच्चों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी की राशि भेजी जाएगी।