लखनऊ में काकोरी के हाजीपुर कॉलोनी स्थित मस्जिद से सटे मकान में आतंकी यहां तीन महीने से रह रहे थे, लेकिन इसके पड़ोसी, इलाकाई लोगों और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। जबकि मकान मालिक मलिहाबाद निवासी बादशाह मौजूदा समय में दुबई में रह रहे हैं।
राजधानी में इससे पहले भी कई आतंकियों को पकड़ा जा चुका है। पिछले साल जनवरी में एनआईए के इनपुट पर एटीएस ने इंदिरानगर से एक संदिग्ध आतंकी अलीम को गिरफ्तार किया था।
उसने पूछताछ में बताया था कि आईएस के आठ आतंकवादियों ने इंदिरानगर में बसंत विहार स्थित मकान में उसके साथ बैठक की थी। इस दौरान आतंकियों ने हरिद्वार में बम ब्लास्ट कर बड़े पैमाने पर तबाही मचाने की योजना बनाई गई थी।
इसके लिए विस्फोटक और अन्य सामग्री भी जुटा ली गई थी। वहीं, कुशीनगर और हरदोई से भी आईएस के दो अन्य संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। एटीएस ने दावा किया था कि ये प्रदेश में बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे।
पकड़े गए संदिग्धों में हरदोई का मुफ्ती हाशिम और कुशीनगर का रिजवान शामिल था। हाशिम ने रिजवान और अलीम को यूपी में स्लीपिंग मॉड्यूल के तौर पर तैयार किया था। अलीम की गिरफ्तारी पिछले साल जनवरी में हुई थी।
वह बतौर मैकेनिक लखनऊ में रह रहा था। ये संदिग्ध आतंकी हरिद्वार के अर्धकुंभ मेले में धमाके करने वाले थे। अलीम व रिजवान ने गिरफ्तार अखलाक को 50 हजार रुपये दिए थे, जो धमाके के लिए जरूरी व्यवस्था करता। अखलाक के साथ मेराज, अजीम व ओसामा को भी गिरफ्तार किया गया था।
सीरिया में मारा गया था बड़ा साजिद
आजमगढ़ का रहने वाला बड़ा साजिद करीब दो वर्ष पहले सीरिया में आतंकियों का साथ देते हुए मारा गया था। इसकी खबर फैलने के बाद यूपी में सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं, लेकिन बड़ा साजिद सीरिया में मारा गया या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी।