स्कूलों के बाहर जाम से निजात और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पिछले कई साल से रणनीति बनाई जा रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक कमेटी भी गठित की गई थी। कई बार बैठकें हुईं, लेकिन जाम को दूर करने का इंतजाम नहीं हो सका। मंगलवार को भी स्कूलों के बाहर अव्यवस्था देखने को मिली। कक्षा पांचवी तक के छात्रों को स्कूल के बाहर ही उतारा और छोड़ा जा रहा था।
अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो स्कूलों की छुट्टी के समय लामार्ट स्कूल के बाहर वाहनों की कतार देखने को मिली। वहीं, सीएमएस गोमतीनगर के बाहर भी लोग सड़कों पर ही वाहन खड़ी कर रहे थे। यहां से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोगों ने सर्विस लेन पर भी कब्जा कर रखा था। यही नहीं, स्कूली वैन का भी सड़क पर ही कब्जा था। सेंट फ्रांसिस स्कूल के बाहर भी यही नजारा दिखाई दिया। उधर, जयपुरिया स्कूल के बाहर भी सड़क पर लोग गाड़ी खड़ी कर देते हैं और बच्चों को लेने स्कूल के भीतर जाते हैं। इससे वहां आवागमन बाधित होता है।
ट्रैफिक मार्शल तैयार करने के दिए गए थे निर्देश
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हाल में ही संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था बबलू कुमार ने स्कूल प्रबंधनों के साथ बैठक की थी। बैठक में यातायात सुधार की रणनीति बनाने पर चर्चा हुई थी। कहा गया था कि सभी स्कूल ट्रैफिक मार्शल नियुक्त करेंगे। ट्रैफिक मार्शल की जिम्मेदारी होगी कि स्कूलों के बारे अव्यवस्था न हो सके। हालांकि, यह निर्देश भी कागजी नजर आया और स्कूलों के बाहर छुट्टी के समय यातायात का दबाव बढ़ गया।
सबसे बड़ी समस्या है पार्किंग
स्कूलों के पास सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। समूचित पार्किंग नहीं होने के कारण स्कूली वाहन सड़क पर ही खड़े होते हैं। बैठक में स्कूलों को उचित पार्किंग के प्रबंध करने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में काम नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने 19 जनवरी को स्कूलों के जिम्मेदारों को तलब किया है। सभी से यह पूछा गया है कि आप लोगों ने क्या तैयारियां की हैं।