लखनऊ। लखनऊ मेरी रग-रग में बसा है। इस शहर और यहां के लोगों की तरक्की ही मेरा सपना है। केकेसी पीजी कॉलेज में आयोजित लिट फेस्ट के अंतिम दिन शुक्रवार को मशहूर फिल्म उमराव जान के निर्देशक मुजफ्फर अली ने प्राचार्य प्रो. विनोद चंद्रा संग चर्चा में ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि मैं प्रगतिवादी हूं और सिनेमा में आ रही डिजिटल तकनीक को तरक्की का कदम मानता हूं। मुझे भारत रत्न सत्यजीत ने प्रभावित किया, इसलिए जैसा उन्होंने कोलकाता के लिए किया, मैं लखनऊ के लिए करना चाहता हूं।
केकेसी कोएड बने इसके लिए दरगाह पर लगाते थे अर्जी : पंकज
कवि पंकज प्रसून ने पुराने किस्से सुनाए। बोले, 20 साल पहले केकेसी कोएड कॉलेज नहीं था। तब प्रेम की कविताओं के दिनों में यहां हनुमान चालीसा का पाठ होता था। कॉलेज कोएड बने, इसके लिए छात्र दो किमी दूर खम्मन पीर बाबा की दरगाह पर अर्जी लगाते थे। यह सुनकर कोई भी हंसी नहीं रोक सका। प्रो. बलवंत सिंह के साथ मंच साझा करते हुए पंकज ने कहा, अभी मैं सीडीआरआई में काम करता हूं। वहां तन की दवा बनती है और कविता में मन की दवा बनती है।
आहिस्ता मिजाजी है शहर की पहचान : हिमांशु बाजपेई
दास्तानगो हिमांशु बाजपेई ने लखनऊ के लोगों की आराम फहमी पर कहा कि आहिस्ता मिजाजी शहर की पहचान है। उन्होंने लखनऊ और मुहर्रम पर किस्से सुनाए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रो. अनिल त्रिपाठी, प्रो. पायल गुप्ता, मंत्री प्रबंधक जीसी शुक्ला, विनायक शर्मा, माधव लखवानी सहित विद्यार्थी थे।
कॉलेज के मैदान से हटवाईं भैंसे : डॉ. दिनेश शर्मा
कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र में पहुंचे राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि उन दिनों जब मैं महापौर था, कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. हरिहरनाथ द्विवेदी ने फोन करके कहा कि कॉलेज के मैदान में तबेला बन गया है। मैंने समस्या को गंभीरता से लेते हुए समाधान कराया। आज उसी जगह इतना भव्य कार्यक्रम हो रहा है। उनके साथ पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी थे।