बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित
दवाओं के माध्यम से दिल का छेद बंद करने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। ऐसे में ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प था। ऐसे में अमेरिका से विशेष पिकोलो डिवाइस मंगाई गई। यह डिवाइस चार गुणा दो मिलीमीटर आकार की थी। सर्जरी करके यह डिवाइस बच्चे के दिल के छेद में डाल दी गई। अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित है।
बच्चे का ऑपरेशन करने वाली टीम
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फिलहाल उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। अगले सप्ताह उसे वेंटिलेटर से हटाकर छुट्टी देने की योजना है। डॉ. अंकित के मुताबिक आमतौर पर बच्चे की उम्र बढ़ने पर ही बच्चे की सर्जरी की जाती है। नई तकनीक से 45 दिन में दिल का छेद बंद करने में सफलता मिली।