मुख्य अभियंता ने बताया कि नए 33/11 केवी उपकेंद्रों के निर्माण में भूमि की कमी बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। नगर निगम, आवास विकास परिषद और जिला पंचायत जैसी संस्थाएं जमीन उपलब्ध नहीं करा रही हैं। ऐसे में अब 1200 वर्गफीट में गैस आधारित उपकेंद्र बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इस तरह के उपकेंद्र पर लगभग 12 से 15 करोड़ रुपये की लागत आती है। राजधानी का पहला गैस आधारित उपकेंद्र विक्रमादित्य मार्ग पर स्थापित किया गया है।
रक्षामंत्री ने दिए हैं निर्देश
रक्षामंत्री ने ओवरहेड तारों को भूमिगत करने का निर्देश दिया है। इससे आंधी-बारिश के दौरान बिजली गुल नहीं होगी। उन्होंने केंद्र से तीन हजार करोड़ रुपये की दिलाने का वादा किया है।-
रवि कुमार अग्रवाल, मुख्य अभियंता, लखनऊ सेंट्रल जोन
राजधानी में बिजली व्यवस्था
13.50 लाख जिले में उपभोक्ता
20 हजार छोटे-बड़े ट्रांसफार्मर
156 उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति