केजीएमयू में फिलहाल दो रोबोट आने की बात चल रही है। पहले रोबोट से ऑपरेशन किए जाएंगे और दूसरे का उपयोग बाकी डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा। शताब्दी फेज एक में पीपीपी मॉडल पर रोबोट लगाया जाना है।
जानें रोबोट कैसे करता है सर्जरी
इस तकनीक का नाम भले ही रोबोटिक सर्जरी हो, लेकिन इसमें भी मुख्य भूमिका डॉक्टर की ही रहती है। बाकी सर्जरी की तरह इसे भी डॉक्टर करते हैं, लेकिन इसमें रोबोट का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें रोबोट का एक भाग मरीज और एक भाग डॉक्टर के पास रहता है। डॉक्टर उसके माध्यम से मरीज से कुछ दूरी पर बैठक सर्जरी को अंजाम देते हैं।
रोबोट नर्स (सांकेतिक तस्वीर)।
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स्पष्ता- रोबोट में मरीज के भीतरी अंगों की थ्रीडी इमेज बनती है। इससे डॉक्टर को भीतरी अंग स्पष्ट दिखाई देते हैं। सामान्य आंखों से इनको देखना संभव नहीं होता है।
सटीकता- समान्य सर्जरी के समय डॉक्टर चीरे की लंबाई और गहराई का अंदाजा लगाकर काम करते हैं। इससे जरूरत से बड़ा चीरा लगाना पड़ता है। वहीं रोबोट निर्धारित लंबाई और गहराई का ही चीरा लगाते हैं।
कम रक्तस्राव- सटीक चीरा होने की वजह से इसमें खून कम बहता है और घाव भी जल्दी भरता है। इस वजह से मरीज को अस्तपाल से जल्द छुट्टी मिल जाती है।