कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जलशक्ति मंत्री ने कहा कि नदी समग्र चिंतन का मूल उद्देश्य नदियों के हर एक पहलू को विस्तार से समझाने और उस पर कार्य करने की प्रभावी योजना तैयार करना है।
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि गंगा और अन्य नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रदेश एक स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। समय की मांग है कि नदियों का पुनर्जीवन हो और इन्हें पुन: मानव जीवन के केंद्र में लाएं। वह बुधवार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सभागार में ‘नदी समग्र चिंतन’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री ने कहा कि इस चिंतन से निकले सुझाव आने वाले समय में नदियों के पुनर्जागरण में लाभकारी होंगे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जलशक्ति मंत्री ने कहा कि नदी समग्र चिंतन का मूल उद्देश्य नदियों के हर एक पहलू को विस्तार से समझाने और उस पर कार्य करने की प्रभावी योजना तैयार करना है। सरकार जल सुरक्षा की दिशा में मिशन मोड पर काम कर रही है। जन-जन के मन में इस भावना लानी होगी कि नदियां हमारी मां समान हैं। इसलिए इनकी रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है। कार्यक्रम में विशेष रूप से नदियों में पानी की कमी, प्रदूषण, अतिक्रमण जैसी तीन प्रमुख समस्याओं को दूर करने के लिए देश भर से पहुंचे विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए।
नदियां हैं जीवनदायिनी : चिदानंद
कार्यक्रम में मौजूद स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि नदियां जीवनदायिनी हैं। नदियों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। मानवता के लिए नदियों को प्रदूषणमुक्त बनाना होगा। ऐसा करने से ही मानव जाति विकास की राह पर अनवरत आगे बढ़ सकेगी।