समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर पुरातत्व विभाग से जांच कराई जा रही है, तो सभी हिंदू मंदिरों की भी जांच कराई जानी चाहिए। इनमें से अधिकांश मंदिर बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं। यहां तक की बद्रीनाथ धाम भी आठवीं शताब्दी तक बौद्ध मठ था। स्वामी प्रसाद मौर्य ने अमर उजाला को यह भी बताया कि शीघ्र ही वह यह फेहरिस्त सामने रखेंगे कि कौन से बौद्ध मठ तोड़कर मंदिर बनाए गए हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा हिंदू धर्म स्थलों की पहले क्या स्थिति थी? इसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही कहा कि गड़े मुर्दे उखाड़े जाएंगे तो बात बहुत दूर तक जाएगी। बेहतर तो यह रहेगा कि समाज में भाईचारा और सौहार्द बना रहे, इसलिए 15 अगस्त 1947 को देश में जिस धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बरकरार रखा जाए।
जब उनसे पूछा गया की बौद्ध मठ तोड़कर मंदिर बनाने की बात कहने का आधार क्या है, तो उन्होंने कहा एएसआई से जांच कराएं तो आधार मिल जाएगा। उन्होंने विकिपीडिया का हवाला देते हुए कहा की आठवीं शताब्दी तक बद्रीनाथ धाम बौद्ध मठ था। आदि शंकराचार्य ने उसे हिंदू मठ में परिवर्तित किया। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, मैं किसी एक धर्म का ठेकेदार नहीं हूं। सभी धर्मों में मेरी आस्था है और उनका सम्मान करता हूं।